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Bihar Property Registration: नीतीश सरकार की नई चाल, राजस्व में रिकॉर्ड उछाल, कैसे हुआ ये कमाल?

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Bihar Property Registration: बिहार में पैसों की बरसात हुई है, और इसकी वजह कोई प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि सरकार का एक सटीक फैसला है। सरकारी खजाने में ऐसी चमक आई है कि अधिकारी भी दंग हैं।

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Bihar Property Registration: नीतीश सरकार की नई चाल, राजस्व में रिकॉर्ड उछाल, कैसे हुआ ये कमाल?

बिहार सरकार का रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी रजिस्ट्री कार्यालय खोलने का निर्णय, जैसा कि उम्मीद थी, राजस्व के मोर्चे पर बेहद सफल साबित हुआ है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निबंधन विभाग ने अपने निर्धारित लक्ष्य 8,250 करोड़ रुपये को न केवल पूरा किया, बल्कि इसे पार करते हुए 8,403.46 करोड़ रुपये का प्रभावशाली राजस्व जुटाया है। यह लक्ष्य का 101.86 प्रतिशत है, जो विभाग की कार्यकुशलता और सरकार की नीतियों का सीधा परिणाम है।

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Bihar Property Registration: छुट्टियों में भी खुली तिजोरी, ऐसे बढ़ा राजस्व

यह अभूतपूर्व वृद्धि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में उठाए गए साहसिक कदमों का प्रमाण है। 10 अप्रैल को राज्यसभा में भी इस बात की चर्चा हुई थी कि कैसे प्रदेश में सुशासन और आर्थिक सुधारों को गति दी जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विभाग ने नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और राजस्व संग्रह को अधिकतम करने के उद्देश्य से इस नीति को लागू किया, जिससे नागरिकों को अपनी संपत्ति का पंजीकरण कराने के लिए अतिरिक्त दिन मिले। इस कदम से न केवल सरकारी खजाने में इजाफा हुआ है, बल्कि आम लोगों के लिए संपत्ति के कागजी कार्य निपटाना भी आसान हो गया है। निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने के प्रयासों ने राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि की है। यह दर्शाता है कि सही नीतिगत फैसले किस तरह राज्य की आर्थिक सेहत को मजबूत कर सकते हैं। Bihar Property Registration में मिली यह सफलता अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम करती है।

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नीतिगत सुधारों का असर: क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़े स्वयं कहानी बयां कर रहे हैं। 8,250 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 8,403.46 करोड़ रुपये का राजस्व, यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह दिखाता है कि राज्य सरकार की दूरगामी सोच और कार्यप्रणाली कितनी प्रभावी साबित हुई है। इस सफलता के पीछे केवल अवकाश के दिनों में कार्यालय खोलना ही नहीं, बल्कि निबंधन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और तकनीकी हस्तक्षेप बढ़ाना भी शामिल है। इससे न केवल कर चोरी पर लगाम लगी है बल्कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में भी सुधार आया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बिहार सरकार अब इस मॉडल को अन्य विभागों में भी लागू करने पर विचार कर सकती है, ताकि पूरे राज्य में राजस्व के स्रोतों को और मजबूत किया जा सके।

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