
Midday Meal Workers: देश के नौनिहालों का पेट भरने वाली ‘मध्याह्न भोजन रसोइया’ अपनी ही थाली खाली होने से परेशान हैं. भागलपुर में 5 अप्रैल को इनकी एक बड़ी बैठक हुई, जहाँ रसोइयों ने सरकार के खिलाफ अपनी भड़ास निकाली और मानदेय व सुरक्षा बढ़ाने की पुरजोर मांग की.
Midday Meal Workers की मुख्य मांगें और चिंताएं
राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइया फ्रंट द्वारा भागलपुर में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में जिले भर से आए रसोइयों ने अपनी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों को आज भी अत्यंत कम मानदेय मिल रहा है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए अपर्याप्त है। इसके साथ ही, कार्यस्थल पर सुरक्षा का भी अभाव है। सभी रसोइयों ने एक स्वर में केंद्र और राज्य सरकार से मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सरकार के वादे और रसोइयों की नाराजगी
बैठक में बताया गया कि सरकार ने अप्रैल से रसोइयों का मानदेय 20,000 रुपये करने की बात कही थी, लेकिन यह घोषणा अभी तक ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाई है। रसोइया मानदेय वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन निराशा ही हाथ लगी है। इससे Midday Meal Workers में भारी नाराजगी है। रसोइयों का कहना है कि सरकार सिर्फ वादे कर रही है, जबकि उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय रहते उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह नाराजगी एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।
आंदोलन की रणनीति और एकजुटता का संकल्प
इस बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत, पटना और दिल्ली में बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन की रणनीति बनाई गई है। जिला संयोजक सहित कई पदाधिकारियों ने रसोइयों की एकजुटता पर जोर दिया और कहा कि संगठित होकर ही वे अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं। सभी ने मिलकर अपने हक के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।






