
कमर्शियल सिलेंडर संकट: दरभंगा के जाले प्रखंड के कई स्कूलों में बच्चों के पेट पर आफत आ गई है। मध्याह्न भोजन योजना गंभीर रूप से प्रभावित हुई है, जिसके चलते मासूमों को बिना खाना खाए ही स्कूल से घर लौटना पड़ रहा है। आखिर क्यों ठप हुई यह महत्वपूर्ण योजना?
बिहार के जाले प्रखंड के कई विद्यालयों में इन दिनों बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिल पा रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने से मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। विभागीय निर्देश के अनुसार, भोजन निर्माण में कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन गैस एजेंसियों द्वारा समय पर आपूर्ति नहीं होने से कई स्कूलों में खाना बनना बंद हो गया है या बंद होने के कगार पर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सिलेंडर की कमी और लकड़ी का सहारा
जाले में जब कमर्शियल सिलेंडर संकट गहराया, तो स्कूलों को मजबूरन वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े। मध्य विद्यालय खेसर के प्रभारी एचएम डॉ. कृष्ण बाबू प्रसाद रजक ने बताया कि उनके विद्यालय को निर्धारित एजेंसी से सिलेंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में उन्हें नौ रुपये प्रति किलो जलावन और तीन रुपये प्रति किलो भाड़ा देकर लकड़ी खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि कच्ची लकड़ी के कारण भोजन बनाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं और धुआं भी अधिक होता है। वहीं चावल के अभाव में विद्यालय में एमडीएम पूरी तरह ठप है।
प्राथमिक विद्यालय सुभाष चौक, जाले के एचएम पंकज कुमार झा ने बताया कि एक दिन करीब 125-126 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे, लेकिन गैस के अभाव में सभी को बिना भोजन कराए घर भेजना पड़ा। उन्होंने कहा कि एजेंसी में कई प्रयासों के बावजूद कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो सका। बाजार में लकड़ी की कीमत अधिक होने के साथ उसकी गुणवत्ता भी खराब है, जिससे धुआं अधिक निकलता है और भोजन का स्वाद भी प्रभावित होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
अस्थायी समाधान और गहराती समस्या
मध्य विद्यालय रेवढ़ा के एचएम खालिद जौहर ने बताया कि गैस नहीं मिलने पर विभाग को सूचना देकर फिलहाल डोमेस्टिक सिलेंडर से एमडीएम संचालित किया जा रहा है, जो एक अस्थायी उपाय है। वहीं कन्या मकतब और बुनियादी विद्यालय दोघरा के प्रभारी शिक्षकों ने बताया कि फिलहाल उनके यहां गैस उपलब्ध है, लेकिन वह खत्म होने के बाद स्थिति संकटपूर्ण हो सकती है।
एमडीएम प्रभारी इमरान ने बताया कि कितने विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना बंद है, इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ विद्यालयों में चावल का भी अभाव है, जिससे समस्या और बढ़ गई है। हालांकि, चावल का उठाव शुरू हो गया है और अगले दिन से भोजन व्यवस्था सामान्य होने की संभावना जताई गई है। कमर्शियल सिलेंडर संकट के चलते कई जगहों पर यह स्थिति बनी हुई है।
विभाग का निर्देश और आगे की राह
विभाग की ओर से यह भी निर्देश दिया गया है कि कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने की स्थिति में अस्थायी रूप से डोमेस्टिक सिलेंडर या अन्य वैकल्पिक साधनों से एमडीएम संचालन सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश तात्कालिक राहत देने वाला है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता स्पष्ट है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







