
Soil Health Card: बिहार में अब खेती करना और भी स्मार्ट और मुनाफे का सौदा बनने वाला है! राज्य सरकार ने किसानों की जमीनों को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए एक जबरदस्त योजना चलाई है. इसका सीधा मकसद है कि किसानों को पता चले उनकी मिट्टी में क्या कमी है और क्या जरूरत.
बिहार में कृषि को आधुनिक, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। किसानों को अपनी जमीन की मिट्टी की सही गुणवत्ता समझने में मदद करने और उसी आधार पर खेती की बेहतर रणनीति बनाने के लिए ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना’ को तेजी से लागू किया जा रहा है। इस योजना का दोहरा लाभ है – न केवल फसल उत्पादन बढ़ाना, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी लंबे समय तक बरकरार रखना और किसानों की लागत कम कर किसानों की आय में इजाफा करना। बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि सरकार किसानों की खेती को वैज्ञानिक आधार देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में केंद्र प्रायोजित ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना’ को पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, ताकि किसान अपने खेत की मिट्टी के वास्तविक पोषण स्तर से वाकिफ हो सकें।
लक्ष्य और उपलब्धि: 3 लाख Soil Health Card जारी
कृषि मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य में तीन लाख मिट्टी नमूनों के संग्रह और विश्लेषण का लक्ष्य रखा गया था। खुशी की बात है कि इस लक्ष्य को लगभग पूरा कर लिया गया है, जिसमें अब तक तीन लाख मिट्टी नमूने एकत्र किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 2.98 लाख नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इन जांच रिपोर्टों के आधार पर किसानों को उनके खेत के लिए विशिष्ट Soil Health Card दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें उर्वरकों के संतुलित और सही उपयोग में मदद मिल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
किसानों के द्वार तक पहुंची मिट्टी जांच की सुविधा
सरकार ने मिट्टी जांच की प्रक्रिया को किसानों के लिए सुलभ बनाने हेतु जिला और अनुमंडल स्तर पर भी मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में, राज्य के 25 जिलों में कुल 32 अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रयोगशालाओं को प्रखंड कृषि कार्यालयों (ई-किसान भवन) में स्थापित किया गया है, ताकि किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच कराने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े। इससे निम्न जिलों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा:
- गोपालगंज
- भभुआ
- रोहतास
- सुपौल
- मधुबनी
- सारण
- पटना
- नवादा
- भोजपुर
- कटिहार
- वैशाली
- पूर्वी और पश्चिमी चंपारण
- खगड़िया
- अररिया
- सीतामढ़ी
- समस्तीपुर
- गया
- मुजफ्फरपुर
- दरभंगा
- बेगूसराय
- भागलपुर
- पूर्णिया
- मुंगेर
- मधेपुरा
कृषि मंत्री ने इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि और कृषि को टिकाऊ बनाना है। उनका मत है कि जब किसान अपनी खेत की मिट्टी की वास्तविक स्थिति को जान पाएंगे, तभी वे उर्वरकों का संतुलित और आवश्यकतानुसार उपयोग कर पाएंगे। मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों के लिए एक वैज्ञानिक मार्गदर्शक दस्तावेज है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की विस्तृत जानकारी देता है। इसी आधार पर किसानों को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें किस फसल के लिए कितना और कौन सा उर्वरक इस्तेमाल करना चाहिए। यह जानकारी किसानों को बेहतर उपज के लिए सही निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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