
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे: देश की एक और महत्वकांक्षी परियोजना पर ब्रेक लग गया है। 610 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के चौथे पैकेज को लेकर केंद्र सरकार ने नए सिरे से प्रस्ताव मांगा है, जिससे इसके निर्माण कार्य में देरी होने की आशंका बढ़ गई है।
Varanasi Kolkata Expressway: बिहार के विकास को रफ्तार देने वाली एक बड़ी परियोजना को लेकर ताजा अपडेट आया है। वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के चौथे पैकेज की मंजूरी में केंद्र ने कुछ नए नियमों के साथ प्रस्ताव मांगा है। आखिर क्या है यह नया प्रस्ताव और बिहार पर इसका क्या असर होगा, आइए जानते हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार ने वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के चौथे पैकेज की मंजूरी के लिए नए सिरे से प्रस्ताव मांगा है। इस नए प्रस्ताव में सड़क निर्माण के साथ-साथ उसके संचालन और रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की दरें और पूरी जानकारी भी मांगी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क निर्माण के बाद उसकी गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए बेहतर रख-रखाव सुनिश्चित करना है, ताकि लंबे समय तक एक्सप्रेसवे अच्छी स्थिति में रहे। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चौथे पैकेज को केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित पीपीपीएसी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एप्रेजल कमेटी) की मंजूरी मिल पाएगी।
रखरखाव और गुणवत्ता पर क्यों जोर?
सूत्रों के अनुसार, बिहार में वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेसवे के चौथे फेज की लंबाई लगभग 41 किलोमीटर है। यह महत्वपूर्ण फेज रोहतास और कैमूर जिले से होकर गुजरेगा। इस खंड का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मोड पर किया जाना है, जिसके तहत निर्माण एजेंसी को अपनी ओर से परियोजना की 60 प्रतिशत राशि खर्च करनी होगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि सरकार वहन करेगी। निर्माण के बाद, टोल के माध्यम से निर्माण एजेंसी अपनी लागत की वसूली करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार में वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेसवे: रूट और लंबाई
पूरे बिहार राज्य में यह एक्सप्रेसवे करीब 159 किलोमीटर लंबाई में चार प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा। इनमें शामिल हैं:
- रोहतास
- कैमूर
- औरंगाबाद
- गया
वर्तमान में, बिहार में इस सड़क का निर्माण रोहतास जिले में तेजी से चल रहा है। साथ ही, कैमूर जिले में भी निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
निर्माण प्रक्रिया और लक्ष्य
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का कुल निर्माण 13 फेज में पूरा किया जाएगा। इस सिक्सलेन एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 610 किलोमीटर है, जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू होकर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो इस क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
भारतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित महत्वाकांक्षी वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के निर्माण में एक नई अड़चन आ गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की एक समिति ने इस एक्सप्रेसवे के चौथे पैकेज की मंजूरी को तकनीकी कारणों से नामंजूर कर दिया है। केंद्र सरकार ने अब इस पैकेज के लिए सड़क निर्माण की अनुमानित लागत, तकनीकी डिजाइन, विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) की पूरी जानकारी के साथ-साथ ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) की दरों को भी शामिल करते हुए एक नया विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे: चौथे पैकेज पर क्यों लगी रोक?
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की समिति ने बिहार से संबंधित कुछ परियोजनाओं को तकनीकी आधार पर खारिज किया था, जिसमें वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का चौथा पैकेज भी शामिल था। इस परियोजना में आई तकनीकी दिक्कत के कारण अब केंद्र ने पूरी जानकारी के साथ दोबारा प्रस्ताव मांगा है ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार में परियोजना की स्थिति और चुनौतियां
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा। इस 610 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का कुल अनुमानित खर्च लगभग 35,000 करोड़ रुपये है। परियोजना को 13 पैकेजों में बांटा गया है, जिसमें कई पैकेजों में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है या ठेके दिए जा चुके हैं।
हालांकि, बिहार में कुछ पैकेजों में तकनीकी, वन क्लीयरेंस और भूमि अधिग्रहण संबंधी चुनौतियां पहले से ही बनी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार में वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के चौथे फेज की लंबाई 41 किलोमीटर है। यह फेज रोहतास और कैमूर जिले से गुजरेगा और इसका निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मोड में किया जाना है। इन चुनौतियों और तकनीकी दिक्कत के समाधान के लिए संबंधित विभागों को तेजी से काम करना होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जानकारी के मुताबिक, बिहार में यह एक्सप्रेसवे करीब 159 किलोमीटर लंबाई में चार जिलों (रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद और गया) से होकर गुजरेगा। फिलहाल बिहार में इस सड़क का निर्माण रोहतास जिले में हो रहा है, और कैमूर जिले में भी निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







