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भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: इन ट्रेनों से हटा सुपरफास्ट चार्ज, यात्रियों को मिली राहत, देखें लिस्ट

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भारतीय रेलवे: अगर आप पटना जंक्शन से ट्रेन में सफर करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है! रेलवे ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कम गति वाली कुछ ट्रेनों से सुपरफास्ट चार्ज हटा दिया है, जिससे यात्रियों को किराए में सीधी बचत होगी। यह कदम उन यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा जो अक्सर इन ट्रेनों से यात्रा करते हैं।

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भारतीय रेलवे का फैसला: क्यों हटा सुपरफास्ट चार्ज?

जानकारी के मुताबिक, भारतीय रेलवे ने उन ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटा दिया है जिनकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटे से कम है। इनमें हावड़ा-देहरादून, कुंभ एक्सप्रेस, विभूति एक्सप्रेस, उपासना एक्सप्रेस और हिमगिरी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं। रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि इन ट्रेनों के लगातार लेट होने के कारण यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले से स्लीपर से लेकर एसी तक के सभी यात्रियों को फायदा मिलेगा। यह फैसला यात्रियों के लिए 15 से 75 रुपए तक की बचत कराएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर पूर्व मध्य रेलवे ने वाणिज्य विभाग को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

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कितना कम होगा ट्रेन किराया?

सुपरफास्ट का दर्जा हटने से ट्रेन किराया 5 से 12 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि सुपरफास्ट सरचार्ज के एवज में यात्रियों से मूल किराए पर लिए जाने वाले शुल्क में कमी की गई है। इसके तहत स्लीपर में 30 रुपए (8 प्रतिशत), एसी-2 और एसी-3 में 45 रुपए (4 प्रतिशत), एसी-1 में (2 प्रतिशत) और जनरल क्लास में 15 रुपए (10 से 12 प्रतिशत) की कटौती की गई है। जानकारों का मानना है कि जिन ट्रेनों से सुपरफास्ट का दर्जा हटाया जाता है, उनकी यात्रा अवधि बढ़ सकती है, लेकिन किराए में कमी से यात्रियों को सीधा लाभ होगा।

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क्या हुआ रेलवे बोर्ड की बैठक में?

हाल ही में संसद की एक समिति ने ट्रेनों की गति को लेकर रेलवे बोर्ड के साथ बैठक की थी। समिति ने बताया था कि दिल्ली-हावड़ा और हावड़ा-देहरादून, जम्मू रूट पर कई ऐसी ट्रेनें हैं जो कागजों में तो सुपरफास्ट की रफ्तार से दौड़ रही हैं, लेकिन हकीकत में वे रेलवे के 55 किलोमीटर प्रति घंटे के तय मानक पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। ये ट्रेनें ट्रैक पर साधारण मेल एक्सप्रेस की तरह ही चलती हैं, जबकि यात्री इनसे अधिक किराया चुकाते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, रेलवे पूर्व मध्य रेल के अलावा देश के सभी 17 जोन में कुल 900 ट्रेनों की समीक्षा करा रहा है। इस समीक्षा के बाद या तो इन ट्रेनों की गति तय मानक से अधिक की जाएगी या फिर उनका किराया कम किया जाएगा। यह एक बड़ा कदम है जिससे यात्रियों को सही सेवा और सही कीमत का लाभ मिलेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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