
Bihar BJP CM: बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। दो दशक से अधिक समय बाद भारतीय जनता पार्टी को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का ऐतिहासिक अवसर मिल रहा है। इस अहम फैसले पर आज दिल्ली में मंथन हो रहा है, जिसके बाद 14 या 15 अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण संभव है।
बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के दिल्ली पहुंचने और शुक्रवार को राज्यसभा सांसद की शपथ लेने के साथ ही बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज दिल्ली में अपने बिहार कोर ग्रुप की अहम बैठक बुलाई है, जिसमें Bihar BJP CM के नाम पर मुहर लग सकती है। आपको बता दें कि यह पहला मौका है जब भाजपा को बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिल रहा है, जबकि दो दशक से अधिक समय से वह Nitish Kumar के नेतृत्व वाली सरकार में सहयोगी रही है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कद्दावर नेता विजय कुमार चौधरी भी इस बात का संकेत दे चुके हैं कि अब भाजपा सरकार का नेतृत्व करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बिहार BJP CM: सीएम पद पर सस्पेंस जारी
बिहार में भाजपा सरकार की कमान किसके हाथ में होगी, यह फैसला भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा लिया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे। विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक पटना भेजे जाएंगे, जिसकी जेब से पर्ची में निकले नाम पर सबकी निगाहें टिकी हैं। भाजपा में हालिया सीएम चयन के उदाहरणों से बिहार में बड़े-बड़े दावेदार भी बेचैन हैं। यह अनिश्चितता केवल भाजपा में ही संभव है कि कौन बनेगा, यह बनने वाले को भी अनुमान न हो।
बिहार में भाजपा के 89 विधायक और 22 विधान पार्षद हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के लिए विधायक या एमएलसी होना ही जरूरी नहीं है। सांसद को भी सीएम बनाया जा सकता है, या कोई ऐसा व्यक्ति भी चुना जा सकता है जो इस समय किसी पद पर न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
संभावित नाम और ‘सरप्राइज’ फैक्टर
जिनके नाम सीएम पद की दौड़ में प्रमुखता से चल रहे हैं, उनमें सम्राट चौधरी और नित्यानंद राय शामिल हैं। उन्हें देवेंद्र फडणवीस या हिमंता बिस्वा सरमा वाले मॉडल में अपना भविष्य दिख रहा होगा। वहीं, कई अन्य नेता मोहन यादव, विष्णुदेव साय, नायब सिंह सैनी, मोहन चरण मांझी और रेखा गुप्ता की तरह पर्यवेक्षक की पर्ची से नाम निकलने की प्रार्थना कर रहे होंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा बिहार में किस पर भरोसा जताती है और यह ऐतिहासिक फैसला किसके पक्ष में जाता है। प्रदेश की राजनीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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