
Sugar Mill: पूर्वी चंपारण के चकिया में एक नई Sugar Mill की स्थापना की कवायद तेज़ हो गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) की केंद्रीय टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण कर इस परियोजना को हरी झंडी दे दी है। यह पहल न सिर्फ क्षेत्र के औद्योगिक विकास को गति देगी, बल्कि हजारों किसानों और स्थानीय लोगों के लिए भी समृद्धि के नए द्वार खोलेगी।
केंद्रीय टीम ने सबसे पहले वर्षों से बंद पड़ी चकिया चीनी मिल का दौरा किया। टीम ने वहां की मौजूदा स्थिति, मशीनरी और बुनियादी ढांचे का बारीकी से आकलन किया। इसके बाद टीम ने करीब पांच किलोमीटर पश्चिम, राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे महुआवा में चिन्हित नई जमीन का भी निरीक्षण किया, जो नई मिल के लिए उपयुक्त मानी गई है। टीम ने किसानों से सीधा संवाद कर गन्ना उत्पादन, आपूर्ति और उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली। कृषि विभाग के अधिकारियों से भी सिंचाई और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
पुरानी और नई साइट का निरीक्षण: क्या कहती है रिपोर्ट?
एनएफसीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि पुरानी मिल की क्षमता काफी कम थी और वह पुरानी तकनीक पर आधारित थी। इसके अलावा, पुरानी मिल के आसपास तेज़ी से शहरीकरण होने के कारण विस्तार की गुंजाइश भी खत्म हो गई थी। यही कारण है कि नई Sugar Mill के लिए महुआवा में एक नए स्थान का चयन किया गया है, जहाँ भविष्य में विस्तार की बेहतर संभावनाएं हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
आधुनिक Sugar Mill की खासियतें और इथेनॉल उत्पादन का भविष्य
अधिकारियों के अनुसार, नई प्रस्तावित मिल 3500 एमटी क्षमता की होगी, जो आधुनिक तकनीकों से लैस होगी। यह पुरानी 500 मीट्रिक टन क्षमता वाली मिल से कहीं अधिक उन्नत होगी। इस मिल में केवल चीनी ही नहीं, बल्कि इथेनॉल उत्पादन, बायो-सीएनजी और अन्य बायो-प्रोडक्ट्स का भी उत्पादन किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक विविधता बढ़ेगी और ऊर्जा सुरक्षा में भी मदद मिलेगी।
किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा
इस नई परियोजना से स्थानीय किसानों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर बड़ा लाभ मिलेगा, जिसमें शामिल हैं:
- नई चीनी मिल के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर हज़ारों रोज़गार के अवसर पैदा होंगे और पलायन रुकेगा।
- गन्ना किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा और वे दीर्घकालिक रूप से आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।
- इथेनॉल उत्पादन और अन्य बायो-प्रोडक्ट्स से कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय बाज़ार और व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे समग्र आर्थिक विकास होगा।
केंद्रीय टीम द्वारा जुटाये गए आंकड़ों और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







