
निजी स्कूल फीस: भागलपुर में निजी स्कूलों की मनमानी अब और नहीं चलेगी! री-एडमिशन फीस और महंगी किताबों के नाम पर अभिभावकों से अवैध वसूली की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। जिलाधिकारी ने सख्त तेवर दिखाते हुए सभी स्कूल प्रबंधनों को चेतावनी जारी की है।
डीएम ने प्रधानाचार्यों को दिए कड़े निर्देश
निजी विद्यालयों द्वारा री-एडमिशन के नाम पर मनमानी शुल्क वसूली और महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाने की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने टाउन हॉल में निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उप विकास आयुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है और यहां किसी भी तरह का अमीर-गरीब का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने सभी स्कूल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जिलाधिकारी ने आगे बताया कि सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन से सभी प्रधानाचार्यों को अवगत करा दिया गया है और उसका पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी भी विद्यालय द्वारा इन नियमों का उल्लंघन किया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निजी स्कूल फीस और री-एडमिशन पर लगाम
प्रशासन के इस कड़े रुख से उन अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जो लंबे समय से निजी स्कूलों की मनमानी वसूली से परेशान थे। अब स्कूल मनमाने तरीके से री-एडमिशन फीस और किताबों की कीमतों पर दबाव नहीं बना पाएंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निजी स्कूल फीस के नाम पर कोई अनुचित बोझ न पड़े, जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। यह कदम शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने और बच्चों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता के साथ-साथ समानता भी बनी रहे। अब अभिभावकों को राहत मिल सकेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







