
बिहार की राजनीति: बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। जन अधिकार पार्टी के संरक्षक और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बड़ा बयान देते हुए जदयू नेता निशांत कुमार को सीएम पद के लिए उपयुक्त चेहरा बताया है। उनका कहना है कि अगर नीतीश कुमार पद छोड़ते हैं, तो जदयू से ही किसी को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। पटना में पत्रकारों से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि राज्य की जनता ने उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि परिस्थितियां बदलती हैं और नीतीश कुमार पद से हटते भी हैं, तो भी मुख्यमंत्री जदयू का ही होना चाहिए।
बिहार की राजनीति: मुख्यमंत्री पद पर पप्पू यादव का बयान
पप्पू यादव ने कहा कि बिहार को एक विनम्र और संतुलित नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री ऐसा होना चाहिए जो समाज में धर्म या जाति की राजनीति न करे, बल्कि सभी समुदायों को समान सम्मान दे। उन्होंने कहा कि जदयू में कई सक्षम नेता हैं, लेकिन निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनने में क्या दिक्कत है? अगर पार्टी चाहे तो उन्हें भी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पप्पू यादव के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
न्यायपालिका और महिला आरक्षण पर भी की बात
इससे पहले, एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में पप्पू यादव ने न्यायपालिका और राजनीति से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जज के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि देश में कई तरह की राजनीतिक और संस्थागत प्रक्रियाएं चल रही हैं, और यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किसे किस तरह के मामलों में उलझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जज पर पैसे लेने का आरोप है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए। पप्पू यादव ने देश की संस्थाओं और राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई।
उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। पप्पू यादव का कहना था कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि समाज के कमजोर तबकों की महिलाओं, जैसे ईबीसी, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई ऐसा कानून लाया जाता है जिसमें इन वर्गों की महिलाओं की हिस्सेदारी की अनदेखी की जाती है, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सामान्य वर्ग की गरीब महिलाओं को भी अवसर दिए जाने की वकालत की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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