
Bihar Politics: बिहार की सियासत में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने 2025 के विधानसभा चुनाव से लेकर नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से संभावित ‘छुट्टी’ तक पर सवाल खड़े किए हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जनता को 10 हज़ार रुपए के लालच में वोट देने के लिए मजबूर किया गया, जिसका खामियाजा अब सामने आ रहा है।
तेजस्वी का आरोप: बिहार पॉलिटिक्स में ’25 से 30, फिर से नीतीश’ सिर्फ एक नारा
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव-2025 ’25 से 30, फिर से नीतीश’ के नारे के साथ उनके चेहरे पर लड़ा गया था।
तेजस्वी के अनुसार, चुनाव से पहले बिहार सरकार के खजाने से जनता को 10-10 हजार रुपये बांटे गए थे, लेकिन इसका पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को मिला। अब सिर्फ चार महीने बाद ही नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से ‘जबरन छुट्टी’ दी जा रही है।बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर बड़ा तल्ख टिप्पणी की है। लिखा है बिहार विधानसभा चुनाव-2025 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरा पर लड़ा गया था। नारा दिया गया “25 से 30, फिर से नीतीश।”चुनाव से पहले 10-10 हज़ार रुपया की रेवड़ी बिहार सरकार के खजाना से बाँटा गया था। लेकिन क्रेडिट प्रधानमंत्री मोदी को मिला। अब चार महीना बाद ही नीतीश कुमार जी की मुख्यमंत्री पद से जबरन छुट्टी की जा रही है।लेकिन इन सब की जिम्मेदार बिहार की जनता है। तेजस्वी जी पिछले कई वर्षों से चिल्ला-चिल्लाकर बता रहे थे की नीतीश कुमार स्वस्थ्य नहीं है। वह बीमार है। इसलिए बिहार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपना नेता चुनें।लेकिन नहीं, दस हज़ार रुपया पाकर वोट किया गया। जिनका चेहरा आगे करके वोट लिया गया अब उसे ही रास्ता से हटा दिया गया है। यानी “26 से 30, नहीं रहे नीतीश।”
जनता को ठहराया जिम्मेदार, बिहार के भविष्य पर सवाल
तेजस्वी यादव ने इन सब के लिए बिहार की जनता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार यह बताते आ रहे थे कि नीतीश कुमार स्वस्थ नहीं हैं और बीमार हैं। उन्होंने जनता से बिहार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपना नेता चुनने की अपील की थी। लेकिन, जैसा कि तेजस्वी ने कहा, जनता ने 10 हजार रुपये पाकर वोट दे दिया, और अब जिसका चेहरा आगे करके वोट लिया गया, उसे ही रास्ते से हटा दिया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। तेजस्वी ने मौजूदा स्थिति को ’26 से 30, नहीं रहे नीतीश’ के रूप में परिभाषित किया, जो बिहार पॉलिटिक्स में एक बड़ा बदलाव है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर कई सवाल खड़े करता है। क्या वाकई जनता ने तात्कालिक लाभ के लिए अपने भविष्य को दांव पर लगाया? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में बिहार की राजनीति में और अधिक स्पष्ट होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







