
Raja Bhartrihari: बांका के चंगेरी गांव में बीते दिनों एक अद्भुत सांस्कृतिक आयोजन हुआ। प्राचीन तिवारी बाबा स्थान पर दो दिवसीय राजा भर्तृहरि कार्यक्रम ने दर्शकों का मन मोह लिया। यह उत्सव सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि 100 साल पुरानी एक ऐसी परंपरा का हिस्सा है, जिसकी अपनी एक अनोखी पहचान है।बांका जिले के बाराहाट थाना क्षेत्र अंतर्गत चंगेरी गांव स्थित प्राचीन शक्तिपीठ तिवारी बाबा स्थान पर दो दिवसीय राजा भर्तृहरि महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय और बाहर से आए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसने देर रात तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध रखा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
कलाकारों ने मोहा मन, प्रोफेसर डॉ सुरेश बिंद ने किया उद्घाटन
इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन प्रोफेसर डॉ सुरेश बिंद ने फीता काटकर किया। उन्होंने बताया कि यह राजा भर्तृहरि कार्यक्रम लगभग 100 वर्षों से अनवरत चला आ रहा है। इसमें ‘बानी’ गाई जाती है और पारंपरिक नर्तकियों द्वारा नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। स्थानीय संस्कृति और लोक कला का यह संगम दशकों से लोगों को एक साथ जोड़ता रहा है।
तिवारी बाबा स्थान की अद्भुत मान्यता और 100 साल पुराना इतिहास
इस तिवारी बाबा स्थान की सबसे बड़ी और अनोखी मान्यता यह है कि अगर किसी व्यक्ति को विषैले सांप ने डंक मार दिया हो, तो उसे यहां लाया जाता है। यह सौ वर्षों का इतिहास रहा है कि जो भी व्यक्ति इस पवित्र स्थान पर आया है, उसे नवजीवन प्राप्त हुआ है।यह महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का एक ऐसा संगम है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। चंगेरी गांव का यह राजा भर्तृहरि कार्यक्रम आज भी अपनी प्राचीनता और चमत्कारी मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







