
संस्कृत विश्वविद्यालय बजट: दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय में एक बार फिर भारी-भरकम घाटे का बजट पारित हुआ है। सीनेट ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चार अरब 57 करोड़ रुपये से अधिक के घाटे वाले बजट पर मुहर लगा दी है। यह आंकड़ा पिछले साल से भी ज्यादा है, जो विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।सोमवार, 22 अप्रैल को माननीय कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में हुई सीनेट की बैठक में वित्त परामर्शी इंद्र कुमार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रस्तावित बजट सदन के पटल पर रखा। इस संस्कृत विश्वविद्यालय बजट में कुल व्यय का अनुमान चार अरब 59 करोड़ 74 लाख 21 हजार 901 रुपये लगाया गया है, जबकि आंतरिक स्रोतों और स्ववित्त पोषित संस्थानों से अनुमानित आय मात्र दो करोड़ 69 लाख 38 हजार 378 रुपये बताई गई है। इस प्रकार, चार अरब 57 करोड़ 04 लाख 83 हजार 523 रुपये का घाटे का बजट पारित किया गया, जिसे अब राज्य सरकार को भेजा जाएगा। पिछले वित्तीय वर्ष में भी विश्वविद्यालय का घाटे का बजट पेश हुआ था, जो इस बार और बढ़ गया है। यानी इस बार लगभग आठ करोड़ रुपये का अतिरिक्त घाटा अनुमानित है।
संस्कृत विश्वविद्यालय बजट में क्या है खास?
विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. निशिकान्त के अनुसार, बजट पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार झा के पर्यवेक्षण में तैयार इस बजट को आठ खंडों में विभाजित कर अलग-अलग शीर्षों में व्यय का उपबंध किया गया है। मौजूदा बजट में पिछले साल की तुलना में आंतरिक आय शीर्ष मद में करीब 69 लाख रुपये अधिक अनुमानित किए गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
वेतन और पेंशन का बोझ
नए बजट में शिक्षकों के वेतन पर 58 करोड़ 10 लाख 7 हजार 624 रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें पीजी विभागों के लिए तीन करोड़ 82 लाख 98 हजार 437 रुपये, 31 अंगीभूत कॉलेजों के लिए 34 करोड़ 59 लाख 38 हजार 428 रुपये और संबद्ध शास्त्री व उपशास्त्री कॉलेजों के लिए 19 करोड़ 67 लाख 70 हजार 759 रुपये का प्रावधान है। हालांकि, यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में एक करोड़ 16 लाख 10 हजार 268 रुपये कम है। इसी तरह, शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन मद में 11 करोड़ 29 लाख 78 हजार 818 रुपये का अनुमान है, जो गत वर्ष से दो करोड़ 17 लाख 53 हजार 512 रुपये कम है। कुल मिलाकर, वेतन मद में सरकार से 69 करोड़ 39 लाख 86 हजार 442 रुपये की मांग की जाएगी, जो पिछले साल से तीन करोड़ 33 लाख 63 हजार 780 रुपये कम है।
पेंशन, पारिवारिक पेंशन और सेवांत लाभ मद में 80 करोड़ 71 लाख 70 हजार 720 रुपये व्यय का अनुमान है, जो गत वर्ष से 13 करोड़ 86 लाख 24 हजार 769 रुपये अधिक है। वेतन और पेंशन के बकाया मद में कुल एक अरब 83 करोड़ 26 लाख 67 हजार 66 रुपये की मांग राज्य सरकार से की जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
घाटे की भरपाई कैसे होगी?
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दर्शाए गए घाटे की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार, रूसा एवं अन्य संस्थानों से प्राप्त अनुदान व दान से, साथ ही आंतरिक संसाधनों को विकसित कर करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यालय के विभिन्न मदों में खर्च के लिए 85 करोड़ 42 लाख 99 हजार 924 रुपये और विकास कार्यों के लिए 26 करोड़ 12 लाख 59 हजार 895 रुपये का अनुमान है। अतिथि शिक्षक व आउटसोर्स कर्मियों के मद में 14 करोड़ 14 लाख 20 हजार रुपये व्यय का प्रस्ताव है। कुल मिलाकर, प्रस्तावित बजट में योजना व गैर-योजना मद में कुल व्यय चार अरब 45 करोड़ 60 लाख 01 हजार 901 रुपये दर्शाया गया है।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें








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