
संस्कृत शिक्षा: क्या आपको लगता है कि संस्कृत सिर्फ पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित है? तो आपकी ये सोच बदलने वाली है। दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्रों को बताया कि कैसे संस्कृत पढ़कर भी IAS-IPS जैसे बड़े ओहदे हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने संस्कृत शिक्षा को बेहद रोजगारोन्मुखी करार दिया है।

बुधवार को कामेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के दरबार हॉल में अधिषद् की 49वीं बैठक हुई। इस दौरान बिहार के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन की अध्यक्षता में कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने सभी का स्वागत किया। उन्होंने छात्रों के बीच एक बड़ी उम्मीद जगाते हुए कहा कि संस्कृत पढ़ने वाले बच्चे भी बड़े-बड़े ओहदे और यश-कीर्ति हासिल कर सकते हैं। इसके लिए पूर्ण लगन, समर्पण और निष्ठापूर्वक अध्ययन की आवश्यकता है।

संस्कृत शिक्षा: अब सिर्फ कर्मकांड नहीं, करियर भी!
कुलपति प्रो. पांडेय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिपेक्ष्य में भी संस्कृत शिक्षा को बेहद रोजगारोन्मुखी कहा जा सकता है। संस्कृत के छात्रों को भी अन्य विषयों के छात्रों के समान पर्याप्त रोजगार के अवसर प्राप्त हैं। उन्होंने बताया कि हमारे पाठ्यक्रमों में संस्कृत के अतिरिक्त हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, गणित, कंप्यूटर, सामान्यज्ञान एवं सामान्यविज्ञान जैसे अनेक विषय शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम का परिश्रमपूर्वक अध्ययन कर संस्कृत के छात्र अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों की भांति यूपीएससी (UPSC), बीपीएससी (BPSC) एवं बैंकिंग आदि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति पा सकते हैं।
सेना में धर्म गुरु एवं संस्कृत महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में शिक्षक के पदों पर नियुक्ति के विशेष अवसर हैं। प्रतिवर्ष शिक्षाशास्त्र उत्तीर्ण होकर सैकड़ों छात्र संस्कृत शिक्षक पद पर नियुक्त हो रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

कुलपति ने संस्कृत शिक्षा की पुरजोर वकालत करते हुए यहां तक कहा कि संस्कृत पढ़कर जो सरकारी अथवा अर्धसरकारी सेवा में नहीं भी जाना चाहते हैं, उनके लिए भी यहां रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं। जैसे कर्मकाण्ड, हस्तरेखा – विज्ञान, वास्तुशास्त्र, भागवत प्रवचन एवं कुंडली निर्माण के द्वारा प्रत्येक संस्कृतज्ञ रोजगार के साथ-साथ सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त करते रहे हैं।
मेधावी छात्र कर रहे हैं नाम रोशन, मिल रहे हैं कई अवसर
कुलपति प्रो. पांडेय ने विश्वविद्यालय के संस्थापक, दानवीर महाराजाधिराज डॉ. (सर) कामेश्वर सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस द्वितीय प्राचीनतम संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तत्कालीन कुलाधिपति डॉ. जाकिर हुसैन एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

कुलपति ने प्रमाण देते हुए बताया कि इस विश्वविद्यालय के परिश्रमी एवं मेधावी छात्र देश के विभिन्न भागों में आईएएस, आईपीएस, बैंकिंग एवं भारतीय सेना में नियुक्ति पाकर सेवारत हैं। हमारे प्राच्य विषयक छात्र विविध विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्राचार्य, प्रधानाचार्य एवं शिक्षक के पदों को सुशोभित कर विश्वविद्यालय का नाम रोशन कर रहे हैं। जो छात्र नौकरी नहीं पा सके हैं, वे भी स्वतंत्र कर्मकाण्डादि व्यवसाय से अर्थोपार्जन कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
उन्होंने बताया कि छात्रों को प्राच्य विषयों के साथ-साथ अंग्रेजी एवं कंप्यूटरज्ञान से परिपूर्ण शिक्षा प्रदान कराने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही संस्कृत संभाषण के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था है। नेट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने हेतु विशेष वर्गों का संचालन भी निशुल्क किया जाता है। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक कार्यों के साथ-साथ क्रीड़ा, व्यायाम, एनएसएस आदि गतिविधियां भी चलाई जा रही हैं।
- शास्त्र संवर्धिनी
- संस्कृत प्रचार मंच
- कलरंजिनी
- पर्यावरण मंच
- युवा चेतना मंच
- क्रीड़ा एवं स्वास्थ्य मंच
- महिला प्रकोष्ठ
जैसे परिषदों का संचालन छात्रों में सामाजिक जागरूकता लाने और सांस्कृतिक पाठ्य सहगामी क्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। नूतन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के संवर्धन की दिशा में नए-नए कार्यक्रम प्रगति पर हैं।
विश्वविद्यालय की चुनौतियाँ और भविष्य की रूपरेखा
कुलपति प्रो. पांडेय ने सभी मान्य सदस्यों से आग्रह किया कि इस विश्वविद्यालय की आय का आंतरिक स्रोत बहुत कम है, जिससे अनेक कार्य बाधित होते हैं। यहां निःशुल्क शिक्षा के साथ उसकी भरपाई नहीं हो सकती है। इसके अतिरिक्त एनईपी-2020 के आधार पर निर्मित चतुर्वर्षीय शास्त्री (स्नातक) पाठ्यक्रम संचालन के लिए राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मियों के बहुत से पद रिक्त हैं जिन पर नियुक्ति होना आवश्यक है। साथ ही नूतन विषय को पढ़ाने के लिए बहुत से पद सृजित करने की भी आवश्यकता है।
कई अंगीभूत महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना की कमी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप बहुविषयक संस्था के रूप में इस विश्वविद्यालय को विकसित करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार के लक्ष्यानुसार शीघ्र समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नामांकन, परीक्षा आदि कार्य का संचालन अपेक्षित है। इसके लिए हमारे पास तकनीकी संसाधनों एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन का अत्यंत अभाव है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी का हार्दिक सहयोग मिलता रहेगा और इन बाधाओं को भी सफलतापूर्वक पार किया जा सकेगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।








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