
बिहार ग्रामीण सड़क उन्नयन: क्या बिहार के गाँवों की तस्वीर बदलने वाली है? बिल्कुल! मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में विकास की नई इबारत लिख रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना पुरानी और जर्जर सड़कों को मजबूत और हर मौसम के लिए उपयोगी बनाने का काम युद्धस्तर पर कर रही है।
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना प्रदेश के 38 जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा संचालित यह योजना पुरानी, जर्जर और क्षतिग्रस्त ग्रामीण सड़कों को आधुनिक मानकों के अनुसार मजबूत, सुरक्षित और दीर्घकालिक बनाने पर केंद्रित है, ताकि साल भर ग्रामीणों को निर्बाध यातायात सुविधा मिल सके। इस पहल से न केवल यात्रा सुगम हो रही है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी मदद मिल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक राज्यभर में हजारों किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों का कायाकल्प किया जा चुका है।
कायाकल्प की रफ्तार और लक्ष्य
योजना विशेष रूप से उन सड़कों को प्राथमिकता दे रही है, जिनकी पंचवर्षीय अनुरक्षण (मेंटेनेंस) अवधि समाप्त हो चुकी है। इन सड़कों को फिर से संरचनात्मक रूप से मजबूत बनाकर लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाने का काम तेजी से चल रहा है। योजनांतर्गत कुल 859 ग्रामीण सड़कों को प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, जिनकी कुल लंबाई 3,036 किलोमीटर है। इनमें से 783 सड़कों का उन्नयन कार्य पूरा हो चुका है, जिससे 2,869 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें मजबूत हुई हैं।
जिलों में बिहार ग्रामीण सड़क उन्नयन की प्रगति
इस दिशा में, मिथिला क्षेत्र के मधुबनी जिले में सर्वाधिक 199 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन किया गया है। इसके बाद पश्चिमी चंपारण में 152 किलोमीटर, समस्तीपुर में 145 किलोमीटर और गया जिले में 142 किलोमीटर सड़कों का कायाकल्प हुआ है। इन कार्यों से स्थानीय स्तर पर यातायात व्यवस्था को नई गति मिली है और ग्रामीण कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार आया है। आने वाले समय में और अधिक सड़कों के उन्नयन के साथ ही राज्य के ग्रामीण नेटवर्क को मजबूत किए जाने की तैयारी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






