
Manamdev Fire: बिहार के जाले प्रखंड की रेवढ़ा पंचायत में 17 अप्रैल को लगी आग ने चार दलित परिवारों का सबकुछ छीन लिया. घटना के दस दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं. उनकी आंखों में आंसू हैं और जुबां पर व्यवस्था के प्रति रोष.
सब कुछ जलकर हुआ राख, अब तक नहीं मिली मदद
जानकारी के अनुसार, मनामदेव गांव में हुए मनामदेव अग्निकांड में बांस, फूस और एस्बेस्टस से बने चार घर पूरी तरह जलकर खाक हो गए. इस भीषण आग में रामसुंदर राम, सुबधी देवी, पिंकी देवी और बिनोद राम समेत चार गरीब दलित परिवार बेघर हो गए. दुखद बात यह है कि तीन बकरियां भी आग की भेंट चढ़ गईं. परिवारों को करीब 50 हजार रुपये नकद, लाखों के आभूषण, कपड़े, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, जरूरी कागजात, घरेलू सामान और गेहूं, चावल, आटा जैसे अनाज का भारी नुकसान हुआ है. इन परिवारों के पास अब न तो सिर पर छत है और न ही खाने के लिए अनाज का एक दाना बचा है.
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्होंने अंचलाधिकारी (CO) और थाना प्रभारी को आवेदन दिया है, लेकिन दस दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें किसी भी प्रकार की राहत सामग्री, भोजन या आवास संबंधी कोई सहायता नहीं मिल पाई है. आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, जिससे पीड़ित और भी ज्यादा हताश हैं.
अधिकारी उदासीन, समाजसेवियों ने दी सांत्वना
रविवार को अनुसूचित जाति कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एवं समाजसेवी अजय कुमार राम और नगर अध्यक्ष बलदेव बैठा मनामदेव गांव पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी. पीड़ितों ने रोते हुए अपनी दर्दनाक कहानी सुनाई और बताया कि उन्हें किस तरह प्रशासन की ओर से अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है. अजय कुमार राम ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और संबंधित विभागों की उदासीनता पर चिंता जताई. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे अंचलाधिकारी के माध्यम से आपदा प्रबंधन विभाग, आपूर्ति विभाग और कल्याण विभाग से इन परिवारों को हर संभव मदद दिलाने का प्रयास करेंगे. इस दौरान पीड़ित परिवारों के सदस्य और मोहल्ले के कई ग्रामीण भी मौजूद थे.
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