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बिहार को केंद्र का बड़ा झटका: इस प्रस्ताव में 75% की भारी कटौती, जानिए क्या होगा असर!

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बिहार के किसानों को केंद्र सरकार से बड़ी निराशा हाथ लगी है। राज्य द्वारा भेजे गए मिट्टी नमूना जांच के प्रस्ताव में केंद्र ने 75% की भारी कटौती कर दी है, जिससे किसानों के लिए खेत की सेहत जानना अब और मुश्किल हो सकता है।

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बिहार सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 6 लाख मिट्टी नमूना जांच का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। लेकिन, केंद्र सरकार ने इसमें भारी कटौती करते हुए केवल डेढ़ लाख नमूनों की जांच को ही मंजूरी दी है। यह पिछले साल (2025-26) के लक्ष्य (3 लाख नमूने) से भी आधा है, जबकि 2024-25 में 5 लाख और 2023-24 में 2 लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य था। हालांकि, बिहार ने हमेशा केंद्र द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया है। इस कटौती के बाद अब कृषि विभाग नए सिरे से जिलावार लक्ष्य तय कर रहा है, जिसे जल्द ही केंद्र को भेजा जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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मिट्टी जांच क्यों है ज़रूरी?

मिट्टी जांच से यह पता चलता है कि खेत की मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है या अधिकता। किसानों को डिजिटल रूप में सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें उनकी मिट्टी का पूरा ब्यौरा होता है। यह कार्ड बिहार सॉइल हेल्थ ऐप (biharsoilhelth.in) के माध्यम से सीधे किसानों के वॉट्सऐप पर भी भेजा जाता है, जो भारत सरकार के पोर्टल से जुड़ा है। मिट्टी जांच की वैधता तीन साल की होती है और यह 106 प्रकार की फसल, फल और सब्जियों के लिए उर्वरक की अनुशंसा भी करती है। इस मिट्टी जांच के आधार पर ही कृषि वैज्ञानिक खेतों में आवश्यक रासायनिक खाद देने की सलाह देते हैं। मिट्टी की आवश्यकता अनुसार खाद का प्रयोग करने से फसल की उत्पादकता बढ़ती है और किसानों को अनावश्यक रासायनिक खाद के उपयोग से बचाया जा सकता है।

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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिट्टी जांच की जाती है, जिसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी और राज्य सरकार 40 फीसदी राशि खर्च करती है। पिछले साल, कुल 3 लाख मिट्टी नमूनों में से 50 हजार प्राकृतिक खेती वाली भूमि के नमूने थे, जिनकी जांच हर साल की जाती है। वहीं, सामान्य खेती के लिए मिट्टी की जांच हर तीन साल पर करनी होती है।

बिहार में मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं का हाल

राज्य के सभी 38 जिलों में मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में कुल 46 प्रमंडलीय स्तर की प्रयोगशालाएं, 3 रेफरल मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं, 4 गुण नियंत्रण प्रयोगशालाएं और 7 बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं भी कार्यरत हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

इस कटौती से बिहार के कृषि क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राज्य सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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