
LPG Price Hike: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की चर्चित बेटी रोहिणी आचार्य ने फिर गैस सिलेंडर को लेकर पीएम मोदी पर हमला किया है। लिखा है …देश की आम जनता पर एक बार फिर महंगाई की तलवार लटकी है। रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें आम आदमी का जीना मुहाल कर रही हैं, और मौजूदा सरकार इस ओर से आंखें मूंदे दिख रही है।
देश इस समय महंगाई के चौतरफा दुष्चक्र का सामना कर रहा है। गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम जनता की जेब और उनके घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है। हालांकि, मौजूदा सरकार की कार्यशैली देखकर लगता है कि उसे आम आदमी की इस दुश्वारी से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं है।
साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही, भाजपा-नीत मोदी सरकार के कार्यकाल में गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि का सिलसिला अनवरत जारी है। सरकार पर आरोप है कि वह पूंजीपतियों के हितों का पोषण कर रही है, जबकि आम जनमानस महंगाई की मार झेलने को मजबूर है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। गैस सिलेंडर की यह बढ़ती कीमतें हर घर की एक बुनियादी ज़रूरत हैं, जिसका असर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हर छोटे-बड़े कारोबार पर पड़ता है।
गैस सिलेंडर क्यों बन रहा है अभिशाप?
गैस सिलेंडर सिर्फ घरों की रसोई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हर बड़े-छोटे कारोबार की भी एक बुनियादी जरूरत है। इसकी कीमत में वृद्धि से मध्यम और निम्न-वर्गीय परिवारों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों का मासिक घरेलू बजट भी बुरी तरह बिगड़ जाता है। अक्सर लोगों को भोजन, शिक्षा या स्वास्थ्य जैसी अन्य जरूरी खर्चों में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ता है। देश का मध्यम-आय वर्ग, जो पहले से ही महंगाई की भीषण मार झेल रहा है, एलपीजी प्राइस हाइक से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है।
LPG Price Hike का सीधा असर: व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर चोट
पूंजीपतियों के हितों को साधने वाली सरकार इस सच्चाई से लगातार आंखें मूंदे रही है कि देश की अधिकांश आबादी या तो गरीब है या मध्यम-आय वर्ग से संबंध रखती है। इस बड़े तबके के लिए महंगा गैस सिलेंडर वास्तव में एक अभिशाप बन चुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से सीधे तौर पर महंगाई और बढ़ती है, जिससे खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छूने लगती हैं।
बढ़ती महंगाई और जनजीवन पर प्रभाव
माल ढुलाई और उत्पादन लागत में वृद्धि होने से अंततः बाजार में हर चीज महंगी हो जाती है, जिसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है। यह स्थिति न सिर्फ आम आदमी की क्रय शक्ति को कमजोर करती है, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे विकास की गति धीमी पड़ सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पढ़िए अक्षरश: क्या लिखा रोहिणी आचार्य ने
मोदी सरकार के चौतरफा महंगाई के दुष्चक्र का दंश झेलने को मजबूर है देश
गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे तौर पर आम जनता की जेब और घर के बजट को प्रभावित करती है , मगर आम जनता की दुश्वारी से मोदी सरकार का दूर – दूर तक कोई लेना – देना नहीं है । आम आदमी पर भारी आर्थिक बोझ डालने के संकल्प के साथ ही आयी है भाजपा नीत पूंजीपतियों की पोषक मोदी सरकार l 2014 में इस सरकार के आने के बाद से ही गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सिलसिला सुरसा के बढ़ते बदन की तरह जारी है l
जनविरोधी मोदी सरकार को इस बात की तनिक भी परवाह नहीं है कि “गैस सिलेंडर हर घर के साथ – साथ प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष रूप से लगभग हर बड़े – छोटे कारोबार – व्यापार की बुनियादी जरूरत है और इसकी कीमत में वृद्धि मध्यम और निम्न-वर्गीय परिवारों व् कारोबारियों के मासिक बजट को बिगाड़ देती है। लोगों को दूसरे जरूरी खर्चों (जैसे भोजन, शिक्षा, या स्वास्थ्य) में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। देश का मध्यम – आय वर्गीय गरीब तबका, जो पहले से ही महंगाई की मार से जूझ रहा है, गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। ”
पूंजीपतियों के हितों का पोषण करने वाली मोदी सरकार , इस सच की जान – बूझ कर निरंतर अनदेखी करती आयी है कि “देश की अधिसंख्य आबादी या तो गरीब है या फिर मध्यम आय वर्गीय और आबादी के इस बड़े तबके के लिए महंगा गैस सिलेंडर अभिशाप है , कमर्शियल गैस सिलेंडर के महंगा होने से सीधे तौर पर महंगाई बढ़ती है , खाने – पीने की चीजों की कीमतें बढ़ जाती हैं , माल ढुलाई और उत्पादन लागत बढ़ जाती है , जिसके परिणामस्वरूप अंततः बाजार में हर चीज महंगी हो जाती है।”







