
भारत-नेपाल जल परियोजनाएं: क्या आप जानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच जल संसाधनों को लेकर दशकों पुराने कई मुद्दे एक झटके में सुलझ गए हैं? हाल ही में नेपाल की राजधानी काठमांडू में कोसी और गंडक परियोजनाओं से संबंधित एक अहम बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों ने भविष्य के सहयोग की नींव रखी। इस दो दिवसीय वार्ता में कई जटिल समस्याओं पर सहमति बनी, जिससे सीमावर्ती इलाकों में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण में सुधार की उम्मीद जगी है।
‘भारत-नेपाल जल परियोजनाएं’ पर महत्वपूर्ण फैसले
भारत-नेपाल कोसी एवं गंडक परियोजनाओं की संयुक्त समिति (JCKGP) की 11वीं बैठक 30 अप्रैल से 01 मई 2026 तक काठमांडू में सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कोसी एवं गंडक परियोजनाओं से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, श्री संतोष कुमार मल्ल ने किया, जबकि नेपाली पक्ष का प्रतिनिधित्व जलश्रोत एवं सिंचाई विभाग के महानिदेशक, श्री मित्र बराल ने किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्र सरकार और बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
प्रमुख मुद्दों पर बनी सहमति
बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी, जो इन परियोजनाओं के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक थे:
- पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के 35 किलोमीटर नेपाली भाग, कोसी बराज सहित पूर्वी एवं पश्चिमी तटबंध के एफ्लक्स बांध, तटबंधों और वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज क्षेत्र के मुख्य पश्चिमी नहर के भागों को शीघ्र अतिक्रमण मुक्त कराने पर सहमति।
- पश्चिमी कोशी मुख्य नहर के बांध पर लगाए गए बिजली के खंभों को स्थानांतरित करने का फैसला, जिससे नहर के संचालन और रखरखाव में आने वाली कठिनाइयों को दूर किया जा सकेगा।
- वीरपुर परिक्षेत्र के पूर्वी एफ्लक्स बांध के कोशी वनटप्पू क्षेत्र में वर्ष 2026 की बाढ़ से पहले कटाव निरोधक कार्य हेतु बालू, मिट्टी और सिल्ट जैसी सामग्रियों के उपयोग पर सहमति।
- कोशी परियोजना के तहत लीज पर ली गई भूमि का सीमांकन GPS तकनीक और भौतिक रूप में एक समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्णय।
- कोशी वनटप्पू क्षेत्र में कटाव निरोधक एवं बाढ़ नियंत्रण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली निर्माण सामग्रियों और वाहनों के दिन-रात आवागमन की अनुमति। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
- कोशी बराज पर वाहनों की गति सीमित करने के लिए संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपाय अपनाने पर सहमति।
- नेपाली पक्ष ने बाढ़ अवधि में कोशी नदी के अत्यधिक जलश्राव के दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा लकड़ी निकालने और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों के कारण बराज के सामान्य संचालन में आ रही बाधा को दूर करने का आश्वासन दिया।
- नेपाल परिक्षेत्र में स्थानीय नगरपालिकाओं और ग्रामपालिकाओं द्वारा कोशी परियोजना के वाहनों के सड़क पर आवागमन पर लगाए जाने वाले स्थानीय कर को भारत और नेपाल के बीच हुए समझौते के अनुरूप न मानते हुए, इसे रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन।
आंकड़े साझा करने और भविष्य की योजनाएं
नेपाल सरकार ने नेपाल भाग में स्थित पश्चिमी कोशी मुख्य नहर और वाल्मीकिनगर गंडक बराज से निकलने वाली मुख्य नहर के कमांड क्षेत्र में कुछ स्थलों पर जल जमाव के निराकरण हेतु जल निकासी की व्यवस्था का अनुरोध किया। भारतीय पक्ष ने संयुक्त स्थल निरीक्षण कराकर समुचित कार्रवाई करने पर सहमति जताई। नेपाली पक्ष द्वारा नेपाल प्रभाग में कराए जाने वाले कार्यों की सूची नियमित रूप से उपलब्ध कराने की मांग पर भारतीय पक्ष ने सहमति दी और इसे ईमेल के माध्यम से भी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। साथ ही, नेपाली मांग के अनुसार सैटेलाइट इमेजरी भी उपलब्ध कराने पर सहमति बनी।
नेपाली पक्ष ने भारतीय पक्ष से अपेक्षा की कि कोशी नदी का प्रवाह मुख्यतः नदी के केंद्रीय भाग में रखने का प्रयास किया जाता रहे। भारतीय पक्ष ने बताया कि बैराज गेट ऑपरेशन मैनुअल के अनुसार नदी की धारा को नदी के केंद्र में रखने का प्रयास किया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस कार्य हेतु इस वर्ष बाढ़ से पूर्व कोशी बराज के अपस्ट्रीम में जमा शोअल लूजनिंग एवं डाउनस्ट्रीम में 2.50 किलोमीटर लंबा पायलट चैनल निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। मानसून अवधि के दौरान जल संचालित फ्लड फॉरकास्टिंग मॉडल के लिए नेपाल भूभाग के वर्षा और नदियों के जलश्राव आंकड़ों को साझा करने हेतु विस्तृत चर्चा 2 मई को हुई, जो इन भारत-नेपाल जल परियोजनाएं की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि:
- भारत सरकार: विदेश मंत्रालय भारत सरकार के प्रतिनिधि प्रथम सचिव (वाणिज्य प्रभाग), भारतीय दूतावास, नेपाल श्री सुमन शेखर, जलशक्ति मंत्रालय से श्री सुनील कुमार (सदस्य, GFCC), श्री पीयूष कुमार त्रिपाठी (सहायक निदेशक-II)।
- बिहार सरकार: श्री वरुण कुमार (अभियंता प्रमुख, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण), श्री ब्रजेश मोहन (अभियंता प्रमुख, मुख्यालय), श्री संजीव शैलेश (मुख्य अभियंता, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण, बीरपुर), श्री अनिल कुमार मंडल (मुख्य अभियंता, सिंचाई सृजन, दरभंगा), श्री अवधेश कुमार सिन्हा (अधीक्षण अभियंता, पीएमसी-4), श्री चंद्रशेखर कुमार (स्थानिक अभियंता, नई दिल्ली) एवं श्री प्रशांत सोनी (संपर्क पदाधिकारी, काठमांडू)।







