
अस्पताल निरीक्षण: बिहार के स्वास्थ्य केंद्रों की हालत अक्सर सवालों के घेरे में रहती है, और मंगलवार को गायघाट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जो दिखा, वो चौंकाने वाला था। सिविल सर्जन खुद गंदगी, टपकती छत और अव्यवस्था देख भड़क उठे और मौके पर ही अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
अस्पताल निरीक्षण में सामने आई गंदगी और अव्यवस्था
गायघाट प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का अस्पताल निरीक्षण करने पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने जैसे ही परिसर में कदम रखा, उन्हें चारों ओर गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ा। शौचालयों की स्थिति इतनी खराब थी कि यह स्पष्ट था कि उनकी सफाई लंबे समय से नहीं हुई है। प्रसव कक्ष और निबंधन काउंटर के ऊपर से छत से लगातार पानी टपक रहा था, जिससे फर्श पर पानी जमा हो रहा था। मरीजों ने शिकायत की कि बारिश के दिनों में अस्पताल में पानी भर जाता है और कई लोग फिसलकर गिर जाते हैं। सिविल सर्जन ने इन गंभीर अनियमितताओं पर स्वास्थ्य प्रबंधक भास्कर शर्मा को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
लापता चिकित्सक और प्रसूताओं की लंबित प्रोत्साहन राशि
निरीक्षण के दौरान दो चिकित्सक – डॉ. सिद्धार्थ और डॉ. सौम्या, तथा काउंसलर दिव्या कुमारी अनुपस्थित पाई गईं। सिविल सर्जन ने तुरंत उनकी हाजिरी काटने का आदेश दिया और स्वास्थ्य प्रबंधक भास्कर से उनकी अनुपस्थिति पर सवाल-जवाब किए। इस दौरान, उन्होंने ओपीडी में इलाज कराने आए मरीजों से भी अस्पताल में मिल रही स्वास्थ्य सेवाएँ की जानकारी ली। मरीजों ने सेवाओं में सुधार की आवश्यकता जताई।
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स्थानीय लोगों ने सिविल सर्जन से एक और गंभीर शिकायत की। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से प्रसव के बाद सरकार की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि प्रसूताओं को नहीं मिली है। इस वजह से अब परिजन गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए सीएचसी लाने से कतराने लगे हैं। सिविल सर्जन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य प्रबंधक को अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएँ और सफाई व्यवस्था में शीघ्र सुधार लाने का निर्देश दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एनजी रब्बानी, सामाजिक उत्प्रेरक मुकेश कुमार और अन्य चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों को भी जवाबदेह रहने को कहा।
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