
CM Residence: बिहार की राजधानी पटना में मुख्यमंत्री आवास को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। राज्य सरकार ने 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर ‘लोक सेवक आवास’ कर दिया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को यही आवास आधिकारिक तौर पर आवंटित किया गया है।
इस बदलाव के पीछे क्या वजह है और इसका क्या असर होगा, इसे लेकर प्रशासन ने स्पष्ट जानकारी दी है। यह निर्णय तब लिया गया है जब मुख्यमंत्री अभी अपने नए आवास में पूरी तरह शिफ्ट नहीं हुए हैं। प्रशासनिक कामकाज में कोई बाधा न आए, इसके लिए यह नई व्यवस्था की गई है।
CM Residence का नाम क्यों बदला गया?
पटना के 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास को अब ‘लोक सेवक आवास’ के रूप में जाना जाएगा। यह नाम सभी सरकारी और आधिकारिक दस्तावेजों में तुरंत लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक पहचान और कार्यप्रणाली को नया रूप देने के उद्देश्य से किया गया है। बिहार में यह पहला मौका नहीं है जब किसी प्रमुख सरकारी भवन का नाम बदला गया हो। इससे पहले राजभवन का नाम बदलकर ‘बिहार लोक भवन’ किया गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह अधिसूचना 1 दिसंबर 2025 को जारी की गई थी, जिसके बाद से सभी आधिकारिक कार्यों में इसी नाम का इस्तेमाल हो रहा है। अब उसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास का नाम भी बदला गया है।
मुख्यमंत्री आवास का दायरा बढ़ा, दो घरों से चलेगा काम
सरकार ने मुख्यमंत्री आवास के दायरे को बढ़ाने का भी फैसला लिया है। 5 देशरत्न मार्ग स्थित आवास को अब 1 अणे मार्ग के मुख्यमंत्री आवास का ही हिस्सा घोषित किया गया है। यह कदम अस्थायी व्यवस्था के तौर पर उठाया गया है ताकि प्रशासनिक कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
इन प्रशासनिक परिवर्तनों का क्या है मकसद?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी फिलहाल अपने पुराने आवास से पूरी तरह शिफ्ट नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए दोनों आवासों को जोड़कर एक विस्तारित परिसर के रूप में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों को काम करने में सुविधा होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। साथ ही मुख्यमंत्री से जुड़े सभी आधिकारिक कार्य अब ‘लोक सेवक आवास’ के नाम से संचालित होंगे।
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नई प्रशासनिक सोच: ‘लोक सेवक आवास’ की नई पहचान
मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी को एक अणे मार्ग आवंटित किया गया था। अब यह सिर्फ मुख्यमंत्री आवास नहीं, बल्कि ‘लोक सेवक आवास’ कहलाएगा। दरअसल, यह बिहार में सीएम आवास का नाम बदला जाना सरकार की एक नई प्रशासनिक सोच को दर्शाता है, जिसे प्रतीकात्मक रूप से जनता और सरकार के बीच जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है।
विधायक परिसर का होगा कायाकल्प: चिल्ड्रन पार्क से लेकर मॉडर्न हेल्थ सेंटर तक
केवल मुख्यमंत्री आवास ही नहीं, बल्कि वीरचंद पटेल पथ स्थित विधायक आवासीय परिसर का विकास भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए एक भव्य चिल्ड्रेन पार्क बनाया जाएगा। साथ ही खाली जगहों पर सजावटी पेड़, खुशबूदार पौधे और हरियाली बढ़ाने की योजना बनाई गई है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। जिला वन पदाधिकारी पीयूष कुमार बरनवाल ने बताया कि परिसर की जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर कई थीम आधारित गार्डन विकसित किए जाएंगे।
- फ्रूट गार्डन
- बटरफ्लाई गार्डन
- हर्बल गार्डन
- मियावाकी गार्डन
- टेराकोटा गार्डन
इसके अलावा बांस के पौधे और कई सजावटी पेड़ भी लगाए जाएंगे। विधायक परिसर का विकास केवल हरियाली तक सीमित नहीं है। विधायक आवासीय परिसर में एक आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की भी योजना है। यहां एलोपैथी के साथ होम्योपैथी और आयुष चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होगी। अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और प्राथमिक जांच जैसी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी एक ही जगह मिलेंगी। इस व्यापक विधायक परिसर का विकास राज्य के जन प्रतिनिधियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
खेल और पर्यावरण का भी रखा जाएगा ध्यान
परिसर में जी+2 मॉडल का एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी तैयार किया जाएगा। इसके ग्राउंड फ्लोर पर जिम और मल्टीपरपस हॉल होगा, जबकि पहले तल पर बैडमिंटन कोर्ट और टेबल टेनिस कोर्ट की सुविधा दी जाएगी। सरकार की यह योजना सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री आवास से लेकर विधायक परिसर तक प्रशासनिक, स्वास्थ्य, खेल और पर्यावरण के स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। इससे सरकारी परिसरों को अधिक आधुनिक, उपयोगी और जनहितकारी बनाने की कोशिश साफ दिख रही है। बिहार की हर बड़ी खबर के लिए आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
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