पुलों की सुरक्षा: बिहार में पुलों की जर्जर हालत को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद राज्य सरकार की आंखें खुलीं और पुलों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के कटिहार प्रमंडल ने सीमांचल के चार जिलों – कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया – के कुल 355 पुलों की विस्तृत तकनीकी जांच करवाई है। इस जांच की रिपोर्ट अब जारी कर दी गई है, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
पुलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल: अररिया के 3 पुल खतरे में
रिपोर्ट के मुताबिक, जहां कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज जिले के अधिकांश पुल सुरक्षित और अच्छी स्थिति में पाए गए, वहीं अररिया जिले के तीन पुलों की हालत बेहद चिंताजनक मिली है। इनमें से दो पुलों को ‘कमजोर’ श्रेणी में रखा गया है, जबकि एक बड़े पुल को ‘असंतोषजनक’ करार दिया गया है। इन खुलासों ने प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है, जो इन पुलों पर निर्भर हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। तकनीकी टीम ने विशेष रूप से रतवा और ककई धार पर बने दो छोटे पुलों की हालत को कमजोर बताया है। ये दोनों पुल जहनपुर-सोहनदार-उरलाहा हसनपुर सड़क पर स्थित हैं। इनमें से एक 18 मीटर लंबा और दूसरा 12.75 मीटर लंबा स्लैब कलवर्ट पुल है। दोनों ही पुल काफी पुराने हैं और इन्हें तत्काल मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है।
मीरगंज-जोगबनी बॉर्डर पुल: सिर्फ छोटे वाहनों को इजाजत
जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर स्थिति मीरगंज-जोगबनी बॉर्डर रोड पर परमान नदी पर बने 100 मीटर लंबे स्क्रू पाइल ब्रिज की बताई गई है। विभागीय जांच में इस पुल के चार पिलर, दो एब्यूटमेंट और वेंट डेक स्लैब को असंतोषजनक पाया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों ने फिलहाल इस पुल को केवल छोटे वाहनों के आवागमन के लिए ही उपयुक्त माना है, जबकि भारी वाहनों के परिचालन को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इससे सीमावर्ती इलाकों में व्यापार और आवागमन प्रभावित होने की आशंका है।
बाढ़ के कारण अटकी जांच, आगे क्या होगा?
पुल निर्माण निगम की रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। अररिया जिले के 74 पुलों का पूरा भौतिक निरीक्षण नहीं हो सका। इसका मुख्य कारण लगातार जलभराव और बाढ़ जैसे हालात थे, जिसके कारण कई पुलों के फाउंडेशन और स्लैब पानी में डूबे हुए थे। तकनीकी टीम उन तक नहीं पहुंच पाई। ऐसे में विभाग ने इन पुलों के विस्तृत निरीक्षण की दोबारा जरूरत बताई है। कटिहार जिले में भी एक पुल के एप्रोच पथ को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। कुरुमहाट-बाजारगांव सड़क स्थित पुल का संपर्क मार्ग बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त पाया गया, हालांकि पुल की मुख्य संरचना सुरक्षित है।
विक्रमशिला सेतु की घटना के बाद बिहार सरकार ने पुलों की सुरक्षा जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। सीमांचल इलाके में बड़ी संख्या में पुराने पुल मौजूद हैं, जिन पर हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में यह तकनीकी रिपोर्ट कई इलाकों में सतर्कता बढ़ाने वाली है। विभाग अब कमजोर और असंतोषजनक पाए गए पुलों की मरम्मत और आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है ताकि भविष्य में कोई अप्रिय घटना न हो। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







