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Jain Temple Patna: 108 फीट ऊंची लगेगी भगवान महावीर की प्रतिमा, जानिए

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Jain Temple Patna: पटना में बन रहा है एक ऐसा भव्य तीर्थ स्थल, जो न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि बिहार के पर्यटन मानचित्र पर भी एक नया अध्याय लिखेगा। गुलजारबाग स्थित कमलदह जी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक जैन तीर्थ का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जहाँ जैन धर्म के महान आचार्य श्री स्थूलीभद्र स्वामी की साधना स्थली और श्रेष्ठी सुदर्शन स्वामी का अलौकिक स्थान है। संपूर्ण जैन श्वेतांबर समाज के सहयोग से यह भावनात्मक और ऐतिहासिक तीर्थ आकार ले रहा है, जो पूरा होने के बाद धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।

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भव्य निर्माण और अद्भुत वास्तुकला

इस ऐतिहासिक धरोहर के जीर्णोद्धार और भव्य निर्माण का जिम्मा मणि लक्ष्मी तीर्थ के दिनेश भाई शाह ने उठाया है। ‘श्री स्थूलीभद्र श्रेष्ठी सुदर्शन जैन श्वेतांबर मणि लक्ष्मी तीर्थ’ नाम से बनने वाला यह विशाल परिसर लगभग 100000 वर्गफीट क्षेत्र में फैला होगा। सफेद संगमरमर से निर्मित यह मंदिर अपनी अद्भुत नक्काशी और भव्य स्थापत्य कला के कारण देश ही नहीं बल्कि विदेशों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करेगा। इस विशाल मंदिर की वास्तुकला ऐसी होगी कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु तत्काल आध्यात्मिक शांति का अनुभव करेंगे।

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इस तीर्थ की सबसे बड़ी विशेषता भगवान महावीर स्वामी की 72 फीट ऊंची प्रतिमा होगी। भगवान महावीर की आयु 72 वर्ष होने के कारण प्रतिमा की ऊंचाई भी 72 फीट निर्धारित की गई है। यह प्रतिमा 36 फीट ऊंचे कमल पर स्थापित होगी, जिससे इसकी कुल ऊंचाई 108 फीट हो जाएगी। यह प्रतिमा पूरे बिहार ही नहीं, देश के प्रमुख धार्मिक आकर्षणों में शामिल होने की क्षमता रखती है।

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तीर्थ परिसर की अन्य विशेषताएं

तीर्थ परिसर को केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे एक संपूर्ण आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला का निर्माण होगा, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ ठहरने की व्यवस्था रहेगी। इसके साथ ही विशाल भोजनशाला, साधु-साध्वियों के उपाश्रय और श्रद्धालुओं के लिए ध्यान एवं साधना केंद्र भी बनाए जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। चूंकि यह भूमि महान आचार्य स्थूलिभद्र स्वामी की साधना स्थली रही है, इसलिए यहां एक भव्य कमल सरोवर का निर्माण भी प्रस्तावित है। हरियाली और पेड़-पौधों से घिरा यह सरोवर आने वाले श्रद्धालुओं को अद्भुत मानसिक शांति प्रदान करेगा। परिसर में जैन जगत, तीर्थंकरों, आचार्य स्थूलीभद्र स्वामी और श्रेष्ठी सुदर्शन स्वामी के जीवन पर आधारित चित्रशाला भी बनाई जाएगी, जहां आने वाले लोग जैन इतिहास और संस्कृति को भी करीब से जान सकेंगे।

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आचार्य स्थूलिभद्र और श्रेष्ठी सुदर्शन का ऐतिहासिक महत्व

करीब 5.04 एकड़ क्षेत्रफल वाली इस ऐतिहासिक भूमि की देखरेख वर्षों से पटना ग्रुप ऑफ जैन श्वेतांबर टेंपल्स कमिटी द्वारा की जा रही है। कला एवं संस्कृति विभाग तथा पुरातत्व विभाग में भी इस भूमि का उल्लेख दर्ज है। आचार्य स्थूलिभद्र जैन धर्म के एक महान आचार्य, विद्वान और तपस्वी मुनि थे। उनका जीवन त्याग, संयम और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण माना जाता है। उन्होंने जैन धर्म के प्रचार-प्रसार तथा आगम ग्रंथों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रेष्ठी सुदर्शन की कथा जैन धर्म में सदाचार, सत्य और चरित्र की प्रेरणा देने वाली मानी जाती है। कहा जाता है कि जब उन्हें सूली पर चढ़ाया गया, तब उन्होंने नवकार महामंत्र का स्मरण किया और सूली सिंहासन में परिवर्तित हो गई। यह घटना आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कार का प्रतीक बनी हुई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह विशाल मंदिर बिहार की गौरवशाली धार्मिक विरासत का प्रतीक बनेगा और आने वाले समय में देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में उभरेगा।

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