
NEET scam: RJD नेता समेत 4 गिरफ्तार, फर्जी पेपर से MBBS दाखिले का बड़ा खुलासा
नीट स्कैम: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो NEET-UG 2026 परीक्षा से पहले छात्रों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला और फर्जी प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर ठगी कर रहा था। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह छात्रों और उनके परिवारों से 20 से 30 लाख रुपये तक ऐंठने की फिराक में था।
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का संचालन बेहद संगठित तरीके से किया जा रहा था। आरोपी छात्रों और उनके अभिभावकों को फर्जी प्रश्न पत्र दिखाकर मेडिकल सीट दिलाने का झांसा देते थे। दिल्ली पुलिस को 2 मई को सूरत पुलिस से जानकारी मिली थी कि दिल्ली में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो NEET परीक्षा के जरिए MBBS दाखिला दिलाने का दावा कर रहा है। इसी सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी शुरू की और महिपालपुर एक्सटेंशन के कई होटलों में छापेमारी की।
NEET scam: कैसे हुआ गिरोह का पर्दाफाश?
जांच के दौरान पुलिस ने एक होटल से विनोद भाई भीखा भाई पटेल सहित चार लोगों को हिरासत में लिया। पटेल गुजरात के छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें अपने जाल में फंसाने का काम करता था। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने अभिभावकों से बड़ी रकम के साथ-साथ 10वीं और 12वीं की मूल मार्कशीट और हस्ताक्षर किए गए खाली चेक भी ले रखे थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसके बाद पुलिस ने यह भी पाया कि कुछ छात्रों को उनके परिवारों से अलग कर गुप्त स्थानों पर रखा गया था। पुलिस ने गाजियाबाद में एक अस्पताल के पास जाल बिछाकर तीन छात्रों को सुरक्षित निकाला, और यहीं से कथित मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार किया गया।
संतोष जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापा मारा, जहां से 15 अन्य छात्रों को बचाया गया। इनमें कुछ नाबालिग भी शामिल थे। ये सभी छात्र 3 मई को होने वाली NEET परीक्षा में शामिल होने वाले थे। पुलिस ने छात्रों को आश्वस्त किया और उन्हें बाद में परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई।
ऐसे काम करता था ठगों का नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह का हर सदस्य अपनी अलग भूमिका निभाता था। पुलिस का दावा है कि संतोष कुमार जायसवाल पूरे नेटवर्क की रणनीति तैयार करता था। डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम पुराने प्रश्न पत्रों और कोचिंग सामग्री के आधार पर फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करने का जिम्मा संभालता था। संत प्रताप सिंह छात्रों के रहने और अन्य व्यवस्थाओं को देखता था, जबकि विनोद भाई भीखा भाई पटेल अभिभावकों से संपर्क साधकर उनका भरोसा जीतने का काम करता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस ने छापेमारी में कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री के 149 पन्ने, छात्रों से जुड़े कई दस्तावेज, हस्ताक्षर किए गए तीन खाली चेक और अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद किए हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यह गिरोह छात्रों की मेडिकल कॉलेज में दाखिले की इच्छा का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी की तैयारी में था। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और पहले भी कई अभ्यर्थियों को नीट स्कैम जैसे मामलों में निशाना बना चुका है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। पढ़िए विस्तार से
नीट घोटाला: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये ऐंठने की फिराक में था।
दिल्ली में बड़े नीट घोटाला का खुलासा
दिल्ली पुलिस को दो मई को सूरत पुलिस से एक अहम सूचना मिली थी। जानकारी के अनुसार, दिल्ली में सक्रिय एक गिरोह NEET परीक्षा के जरिए MBBS में मेडिकल दाखिला दिलाने का झूठा दावा कर रहा था। इस इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच ने फौरन तकनीकी निगरानी शुरू की। जांच के दौरान महिपालपुर एक्सटेंशन इलाके के कई होटलों में छापेमारी की गई, जहां से चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। इनमें विनोद भाई भीखा भाई पटेल भी शामिल था, जो गुजरात के छात्रों और उनके परिवारों तक पहुंच बनाकर उन्हें अपने जाल में फंसाता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
छात्रों को कैसे फंसाया जाता था और बंधक बनाकर रखा
पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। गिरोह छात्रों और उनके अभिभावकों से 20 से 30 लाख रुपये की बड़ी रकम की मांग करता था। पैसे के अलावा, 10वीं और 12वीं की मूल मार्कशीट और हस्ताक्षर किए गए खाली चेक भी लिए जाते थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों को उनके परिवारों से अलग कर गुप्त स्थानों पर रखा गया था। इसके बाद पुलिस ने गाजियाबाद के एक अस्पताल के पास जाल बिछाया और तीन छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसी कार्रवाई के दौरान, कथित मास्टरमाइंड संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार किया गया। संतोष कुमार जायसवाल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय सचिव भी हैं।
मास्टरमाइंड की भूमिका और आगे की जांच
उनकी गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापा मारा, जहां से 15 और छात्रों को बचाया गया। इनमें कुछ नाबालिग भी थे। ये सभी छात्र 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा में शामिल होने वाले थे। पुलिस ने छात्रों को समझाया और बाद में उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस गिरोह का हर सदस्य अलग-अलग भूमिका निभा रहा था। यह नीट घोटाला करोड़ों रुपये की ठगी की फिराक में था। संतोष कुमार जायसवाल पूरे नेटवर्क की रणनीति तैयार करता था, जबकि डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम पुराने प्रश्न पत्रों और कोचिंग सामग्री के आधार पर फर्जी प्रश्न पत्र बनाता था। संत प्रताप सिंह छात्रों के आवास और अन्य व्यवस्थाएं संभालता था, और विनोद पटेल परिवारों से संपर्क कर भरोसा जीतने का काम करता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री के 149 पन्ने, छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, हस्ताक्षर किए गए तीन खाली चेक और अन्य आपत्तिजनक कागजात बरामद किए हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि यह गिरोह छात्रों की मेडिकल कॉलेज में मेडिकल दाखिला की इच्छा का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने की तैयारी में था। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हैं। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और पहले भी कई अभ्यर्थियों को निशाना बना चुका है।
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