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बिहार कैबिनेट एनालिसिस: आधे से ज़्यादा मंत्री दागी, 90% करोड़पति; ADR रिपोर्ट का बड़ा खुलासा

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Bihar Cabinet Analysis: बिहार की सियासत में एक बार फिर बवाल मचा है! एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार के मंत्रियों के शपथ पत्रों का जो विश्लेषण जारी किया है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 मई को हुए कैबिनेट फेरबदल के बाद मंत्रियों द्वारा दिए गए हलफनामों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

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बिहार कैबिनेट एनालिसिस: आपराधिक रिकॉर्ड और संपत्ति का लेखा-जोखा

ADR और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, कुल 31 मंत्रियों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 15 मंत्रियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। यह संख्या कुल मंत्रियों का लगभग 48 प्रतिशत है। इनमें से 9 मंत्री ऐसे हैं जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जो भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के तहत आते हैं। यह विश्लेषण 2025 के बिहार विधानसभा और विधान परिषद चुनावों से पहले जमा किए गए एफिडेविट पर आधारित है।

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रिपोर्ट में मंत्रियों की संपत्ति को लेकर भी अहम खुलासे हुए हैं। विश्लेषण में शामिल 31 मंत्रियों में से 28 मंत्री करोड़पति पाए गए हैं, जो कुल मंत्रिमंडल का 90 प्रतिशत हिस्सा है। उनकी औसत घोषित संपत्ति 6.32 करोड़ रुपये बताई गई है। भाजपा नेता रमा निषाद सबसे अधिक संपत्ति वाले मंत्री हैं, जिनके पास 31.86 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति है। वहीं, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के संजय कुमार ने सबसे कम 22.30 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यह बिहार कैबिनेट एनालिसिस रिपोर्ट आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छेड़ रही है।

मंत्रियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि

शैक्षणिक योग्यता के मामले में भी रिपोर्ट ने विवरण प्रस्तुत किया है। मंत्रिमंडल में 22 मंत्री ऐसे हैं जो स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं। वहीं, 8 मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता आठवीं से बारहवीं के बीच दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि मंत्रिमंडल में शिक्षा के विभिन्न स्तरों के मंत्री शामिल हैं।

कुछ मंत्री रिपोर्ट में क्यों नहीं शामिल?

ADR रिपोर्ट में चार नेताओं को लेकर अलग स्थिति बताई गई है। जनता दल यूनाइटेड के अशोक चौधरी और भाजपा के प्रमोद कुमार को शपथ पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ी, क्योंकि वे दोनों विधान परिषद के मनोनीत सदस्य हैं। इसी प्रकार, आरएलएम के दीपक प्रकाश और जदयू के निशांत कुमार का विवरण इस रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वे फिलहाल बिहार विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

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