
Heatwave Safety: मुजफ्फरपुर में पड़ रही चिलचिलाती गर्मी और लू के कहर से बच्चों को बचाने के लिए जिला शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। अब स्कूलों में बच्चों के लिए पेयजल से लेकर जागरूकता कार्यक्रम तक, हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आइए जानते हैं क्या हैं ये नए निर्देश और कैसे होगा बच्चों का बचाव।
मुजफ्फरपुर में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्वशिक्षा अभियान) कृतिक वर्मा ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और विद्यालय अवर निरीक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में बच्चों की ‘Heatwave Safety’ सुनिश्चित करना है।
पेयजल और रखरखाव की व्यवस्था
जारी किए गए पत्र के अनुसार, स्कूलों में बच्चों के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी। सभी हैंडपंप (चापाकल) और बोरिंग चालू हालत में होने चाहिए। यदि कोई चापाकल खराब है, तो उसकी मरम्मत तत्काल प्रभाव से कराई जाए। इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों को किसी भी हाल में पानी की कमी महसूस न हो।
भीषण गर्मी के मद्देनजर, स्कूलों में बच्चों के बीच ‘क्या करें और क्या न करें’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को गर्मी, लू और डिहाइड्रेशन से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि उनकी ‘Heatwave Safety’ बनी रहे।
जागरूकता कार्यक्रम और बचाव के उपाय
जिला शिक्षा विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जागरूकता सत्रों के दौरान, शिक्षकों द्वारा बच्चों को लू लगने के लक्षण और प्राथमिक उपाय बताए जाएंगे। इससे बच्चे खुद भी सतर्क रह पाएंगे और ज़रूरत पड़ने पर सही कदम उठा सकेंगे।
- स्कूल परिसर में स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता
- सभी हैंडपंप/बोरिंग की नियमित मरम्मत और रखरखाव
- बच्चों के बीच गर्मी से बचाव पर जागरूकता सत्र
- शिक्षकों द्वारा बच्चों को लू लगने के लक्षण और प्राथमिक उपाय बताए जाएं
नए गाइडलाइन और स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी
गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों में मिट्टी का घड़ा रखना अनिवार्य किया गया है ताकि बच्चों को ठंडा पानी मिल सके। साथ ही, बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने के लिए अलग से घंटी बजाने का निर्देश भी दिया गया है। स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे सूती, हल्के और हल्के रंग के कपड़े पहनकर ही स्कूल आएं, जिससे उन्हें गर्मी से राहत मिल सके। जिला शिक्षा विभाग का मानना है कि इन उपायों से स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा और गर्मी के मौसम में उनकी पढ़ाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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