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Darbhanga Education News: मिथिला विश्वविद्यालय में Eco-Anxiety मंथन, विशेषज्ञों ने कहा- प्रकृति का शोषण नहीं, उपभोग करें, जानिए -क्या है Eco-Anxiety और क्यों है यह चिंताजनक?

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Eco-Anxiety: क्या आपको भी लगता है कि पर्यावरण खतरे में है और हमारा भविष्य सुरक्षित नहीं? यह सिर्फ आपकी चिंता नहीं, बल्कि एक वैश्विक समस्या है जिसे ‘इको-एंजाइटी’ कहते हैं। इसी गंभीर विषय पर दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया, जहां विशेषज्ञों ने पर्यावरण, समाज और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी पर गहन चर्चा की।

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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU), दरभंगा के स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग ने हाल ही में ‘इको इंजाइटी और समाज’ विषय पर एक सफल सेमिनार का आयोजन किया। विभागाध्यक्ष सह संकायाध्यक्ष प्रो. ध्रुव कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से विचार करना था। मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. प्रियंका राय ने अपने व्याख्यान में ‘पर्यावरण’, ‘चिंता’ और ‘समाज’ इन तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की।

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क्या है Eco-Anxiety और क्यों है यह चिंताजनक?

डॉ. प्रियंका राय ने स्पष्ट किया कि Eco-Anxiety उन पर्यावरणीय घटनाओं से उत्पन्न होने वाली चिंता को कहते हैं, जो यह दर्शाती हैं कि हमारा भविष्य अब सुरक्षित नहीं है। उन्होंने बताया कि यह चिंता व्यक्तिगत स्तर पर भले ही भारी महसूस हो, लेकिन जब इसे साझा किया जाता है, तो यह समाज को एक साथ लाने और सामूहिक कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का काम करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस जागरूकता से ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।

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पर्यावरण के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी

विशिष्ट वक्ता, विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. ममता स्नेही ने पर्यावरण के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति का हम जितना उपभोग करते हैं, हमें उतना ही उसे लौटाना भी चाहिए। उनका संदेश था कि पर्यावरण का उपयोग करें, लेकिन उसका शोषण कदापि न करें। यह पर्यावरण संरक्षण का मूल मंत्र है।

सामूहिक प्रयास से ही संभव है समाधान

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. ध्रुव कुमार ने सभी नागरिकों से एक अच्छा नागरिक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्तिगत स्तर पर पहल होगी, तभी सामाजिक और अंततः राष्ट्रीय स्तर पर पहल संभव हो पाएगी। प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण के प्रति जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। Eco-Anxiety को कम करने के लिए यह व्यक्तिगत और सामूहिक जागरूकता ही पहली सीढ़ी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. प्रमोद गांधी ने किया, जबकि स्वागत भाषण सहायक प्राध्यापिका डॉ. लक्ष्मी कुमारी ने दिया, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण में सभी की भागीदारी को अनिवार्य बताया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापिका डॉ. राफिया काजिम ने किया और पर्यावरण को बचाने के लिए हर व्यक्ति के योगदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस सफल सेमिनार की संयोजिका डॉ. सुनीता कुमारी थीं। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक, बड़ी संख्या में शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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