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NH-27 पर सफल हुई Miyawaki Plantation, 10,000 से ज़्यादा पेड़ों से हरा-भरा हुआ इलाका…धूल के गुबार और तपती धूप… अब ये सब गुजरे जमाने की बात

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Miyawaki Plantation: हाईवे किनारे खाली पड़ी जमीन, धूल के गुबार और तपती धूप… अब ये सब गुजरे जमाने की बात हो गई है। बिहार के पटना में NH-27 पर पर्सोनीखेम फी प्लाजा के पास भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक पहल ने इस पूरे नजारे को बदल दिया है। जहां कभी बंजर जमीन थी, आज वहां घना जंगल लहलहा रहा है।

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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर परसोनीखेम फी प्लाजा के समीप अधिगृहीत खाली भूमि पर पिछले वर्ष शुरू किया गया ‘मियावाकी प्लांटेशन’ अभियान अब एक सफल हरित पहल के रूप में उभरकर सामने आया है। जहां पहले इस क्षेत्र में खाली ज़मीन और धूल दिखाई देती थी, वहीं आज पूरा इलाका घनी हरियाली से भर गया है। इससे यात्रियों को स्वच्छ एवं सुखद वातावरण मिल रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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एनएचएआई के सतत एवं अथक प्रयासों से विकसित यह ‘मियावाकी फॉरेस्ट’ न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग की सुंदरता को बढ़ा रहा है, बल्कि यात्रियों को स्वच्छ, ठंडा एवं अधिक सुखद वातावरण का अनुभव भी प्रदान कर रहा है। राजमार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए यह हरित क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है तथा ‘ग्रीन हाईवे’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान कर रहा है।

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कैसे काम करती है मियावाकी तकनीक?

मियावाकी तकनीक जापान की एक विशेष वृक्षारोपण पद्धति है, जिसमें कम स्थान पर अधिक संख्या में स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पौधे सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में अधिक तेजी से विकसित होते हैं और कुछ ही वर्षों में घना एवं आत्मनिर्भर मिनी फॉरेस्ट तैयार हो जाता है। इस परियोजना के अंतर्गत 10 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें:

  • नीम
  • जामुन
  • अर्जुन
  • करंज
  • गुलमोहर
  • पीपल सहित कई अन्य स्थानीय प्रजातियों के पौधे
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ये पौधे अब तेजी से विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में यह हरित क्षेत्र प्रदूषण कम करने, धूल को नियंत्रित करने, वायु गुणवत्ता बेहतर बनाने तथा आसपास के तापमान को संतुलित रखने में सकारात्मक योगदान दे रहा है।

पर्यावरण संरक्षण में मियावाकी प्लांटेशन की अहम भूमिका और Green Highway के कदम

इस संबंध में एनएचएआई, परियोजना कार्यान्वयन इकाई (पीआईयू) मुज़फ्फरपुर के परियोजना निदेशक श्री आशुतोष सिन्हा ने बताया कि मियावाकी तकनीक से विकसित वन क्षेत्र कम रखरखाव में भी तेजी से विकसित होते हैं तथा लंबे समय तक टिकाऊ बने रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार पौधों के अच्छी तरह विकसित हो जाने के बाद इन्हें बहुत कम देखभाल और सिंचाई की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह भी कहा कि एनएचएआई सड़क अवसंरचना विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता देते हुए लगातार ‘ग्रीन हाईवे’ की दिशा में कार्य कर रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

उन्होंने आगे बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी श्री एन. एल. येवतकर के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में पर्यावरण संरक्षण और हरित राजमार्ग को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न पहलें लगातार संचालित की जा रही हैं। एनएचएआई का उद्देश्य केवल बेहतर सड़क अवसंरचना विकसित करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ विकास को भी बढ़ावा देना है। एनएचएआई की यह पहल दर्शाती है कि आधुनिक सड़क अवसंरचना विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। ग्रीन हाईवे की दिशा में किया जा रहा यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, बेहतर पर्यावरण और अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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