
PM मोदी सांस्कृतिक कूटनीति: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया विदेश यात्राओं में एक बार फिर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परचम लहराया है। इस बार उन्होंने बिहार के दो अनमोल रत्नों – जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना और मछली आकृति वाली मधुबनी पेंटिंग को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर न सिर्फ प्रदेश का मान बढ़ाया, बल्कि स्थानीय उत्पादों को नई पहचान भी दी। यह कदम बिहार की सांस्कृतिक और कृषि विरासत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देने वाला है।

वैश्विक मंच पर बिहार की पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान यूएई के क्राउन प्रिंस को जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना भेंट किया। वहीं, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री को मछली की आकृति वाली मधुबनी पेंटिंग उपहार में दी। ये उपहार हाल ही में उनके विदेश दौरे के दौरान दिए गए। इस भेंट को बिहार के पारंपरिक उत्पादों और लोक कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी संदेश माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसे बिहार के लिए गर्व और सम्मान का क्षण बताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक शैली में भारतीय संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को विशेष स्थान मिलता रहा है। इस बार भी उन्होंने बिहार की पहचान से जुड़े दो प्रमुख प्रतीकों को दुनिया के सामने रखा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। यूएई के क्राउन प्रिंस को दिया गया मिथिला मखाना सिर्फ एक कृषि उत्पाद नहीं है, बल्कि यह बिहार के किसानों की मेहनत और मिथिला क्षेत्र की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।
PM मोदी की सांस्कृतिक कूटनीति और बिहार का बढ़ता गौरव
मिथिला मखाना को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है, जिसके बाद इसकी मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में बढ़ी है। बिहार के कई जिलों में हजारों किसान मखाना उत्पादन से जुड़े हुए हैं। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार इसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी नेताओं को यह उपहार देने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिथिला मखाना की पहचान और मजबूत हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री को भेंट की गई मधुबनी पेंटिंग भी काफी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह पेंटिंग मछली की आकृति पर आधारित थी। मिथिला कला में मछली को समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित सह-अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है। मधुबनी पेंटिंग बिहार की सबसे प्रसिद्ध लोक कलाओं में से एक है, जिसकी पहचान अब कई देशों तक पहुंच चुकी है।
कूटनीति का नया आयाम: सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बिहार की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय उत्पादों के सम्मान का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मिथिला बोर्ड की स्थापना और बिहार के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के प्रयास लगातार तेज हुए हैं। इससे स्थानीय उद्यमों और किसानों को नई आर्थिक ताकत मिल रही है। सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि मधुबनी पेंटिंग केवल कला नहीं है, यह बिहार की परंपरा, आस्था और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। उन्होंने जोर दिया कि इस तरह के सांस्कृतिक उपहार भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूत करते हैं और दुनिया को भारतीय लोक विरासत से जोड़ते हैं। इस तरह के कदम न केवल व्यापारिक संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाते हैं, जो PM मोदी सांस्कृतिक कूटनीति का एक अहम हिस्सा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें








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