
OLX Cyber Fraud: डिजिटल ठगों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, और अब बेतिया में इसका एक बड़ा मामला सामने आया है। मुफस्सिल पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो OLX पर बाइक बेचने के नाम पर लोगों को चूना लगा रहा था। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को धर दबोचा गया है। पुलिस ने इनके पास से कई मोबाइल, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज और फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं।
कैसे हुआ OLX Cyber Fraud का खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब मुफस्सिल थाना क्षेत्र के महनागनी गांव निवासी दीपक साह ने OLX ऐप पर एक स्प्लेंडर प्लस बाइक खरीदने का विज्ञापन देखा। डील 64,500 रुपये में तय हुई। आरोपियों ने पीड़ित को नानोसती इलाके में बुलाया और बाइक दिखाकर सौदा पूरा किया। पीड़ित के बेटे अमन कुमार ने 44,500 रुपये फोन-पे से और 20,000 रुपये नकद दिए। शुरुआती दिनों में बाइक सामान्य तरीके से चलती रही, लेकिन कुछ दिनों बाद जब बाइक को बगहा स्थित सर्विस सेंटर में सर्विसिंग के लिए ले जाया गया, तो बड़ा खुलासा हुआ।
सर्विस सेंटर ने बताया कि बाइक के जो दस्तावेज दिखाए गए थे, उस नंबर और चेसिस का असली वाहन किसी और के पास मौजूद है। यह सुनते ही पीड़ित परिवार को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने तुरंत मुफस्सिल थाने में शिकायत दर्ज कराई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पुलिस ने इस मामले में कांड संख्या 165/26 के तहत एफआईआर दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की।
चार साइबर ठग गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज बरामद
पुलिस ने मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों की पहचान की। जांच के बाद साइबर ठगी गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इनमें पहाड़पुर थाना क्षेत्र के सरैया विलती टोला निवासी सूरज कुमार और संदीप कुमार शामिल हैं। इसके साथ ही, जितना थाना क्षेत्र के झांझर गांव के विशाल कुमार और विवेक कुमार को भी पकड़ा गया है। इन गिरफ्तारियों से OLX Cyber Fraud के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। यह ऑनलाइन बाइक धोखाधड़ी का मामला दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कितनी सावधानी की जरूरत है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनमें बैंक खातों से जुड़े कागजात, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और फर्जी आधार कार्ड शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस गिरोह के तार और कहाँ-कहाँ तक फैले हैं, इसका खुलासा होना अभी बाकी है। इस तरह की ऑनलाइन बाइक धोखाधड़ी से बचने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वाहन खरीदते समय दस्तावेजों की गहन जांच करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि वाहन का इंजन नंबर, चेसिस नंबर और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की पुष्टि किए बिना भुगतान करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। इस मामले के सामने आने के बाद जिले में ऑनलाइन वाहन खरीद-बिक्री को लेकर सतर्कता काफी बढ़ गई है।
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