
Bihar Animal Husbandry: बिहार में पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े लाखों किसानों और पशुपालकों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में क्रांति लाने का मन बना लिया है और इसके लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। एक हालिया उच्चस्तरीय बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल करने का रोडमैप तैयार किया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस: उन्नत पशुधन और महिला सशक्तिकरण
लोक सेवक आवास में आयोजित डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षात्मक बैठक में राज्य सरकार ने पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र को लेकर कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। बैठक का मुख्य फोकस किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना था। इस दिशा में सरकार ने कॉम्फेड के जरिए उन्नत नस्ल की गाय, भैंस और बकरी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसका सीधा लाभ पशुपालकों को मिलेगा, जिससे दूध और मांस उत्पादन बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज लोक सेवक आवास, 1 अणे मार्ग में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कॉम्फेड के माध्यम से राज्य के पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु- गाय, भैंस, बकरी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि इसमें महिला पशुपालाकों को प्राथमिकता दी जाय।
इसके साथ ही, महिला पशुपालकों को योजनाओं में प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया। महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने पर बल दिया गया है, ताकि ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हों और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सरकार चाहती है कि ग्रामीण इलाकों में पशुपालन और मत्स्य पालन रोजगार का एक मजबूत माध्यम बने, और इसी उद्देश्य से कॉम्फेड के जरिए बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराने की योजना पर तेजी से काम करने को कहा गया है। इससे दूध उत्पादन बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
दुग्ध, मत्स्य और पशुधन उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि: Bihar Animal Husbandry का नया अध्याय
बैठक में दुग्ध उत्पादन को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। सुधा के माध्यम से दूध उत्पादन को मौजूदा 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 1 करोड़ 25 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह राज्य के डेयरी सेक्टर के लिए एक बड़ा विस्तार साबित होगा। सरकार का फोकस सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग और मार्केटिंग नेटवर्क को भी मजबूत करने पर है।
इसी तरह, मत्स्य उत्पादन को भी 9 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है। विभागीय अधिकारियों को इस दिशा में योजनाओं को तेजी से लागू करने का निर्देश दिया गया है। बिहार की मछलियों को नेपाल और सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने की रणनीति भी बनाई गई है, जिससे मत्स्य पालकों को बड़ा बाजार मिलेगा और उनकी कमाई में इजाफा होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार मिलेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और बाजार विस्तार
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पशुपालकों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचे और इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मत्स्य क्षेत्र के लिए सप्लाई चेन और बाजार व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बाहरी बाजार मिलने से मत्स्य पालकों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इन सभी कदमों से बिहार के Bihar Animal Husbandry और मत्स्य पालन क्षेत्र में एक नई क्रांति आने की संभावना है, जिससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि राज्य की समग्र आर्थिक प्रगति को भी बढ़ावा मिलेगा।








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