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Bihar Cyber Helpline AI: भारत में पहली बार, अब साइबर ठगों की खैर नहीं, मिलेगी तत्काल मदद, जानिए

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Bihar Cyber Helpline AI: अब बिहार में साइबर ठगों की खैर नहीं! राज्य का हेल्पलाइन नंबर 1930 जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस होने वाला है। यह संभवतः देश का पहला ऐसा AI आधारित साइबर हेल्पलाइन होगा, जिससे शिकायतें न सिर्फ तेजी से दर्ज होंगी बल्कि पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ का पूरा फायदा मिल पाएगा।

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Bihar Cyber Helpline AI: शिकायत दर्ज करने में अब नहीं लगेगा समय

वर्तमान व्यवस्था में साइबर अपराध से पीड़ितों की शिकायतें 1930 पर मानव ऑपरेटर द्वारा मैनुअल रूप से दर्ज की जाती हैं, जिसमें प्रत्येक मामले में कम से कम 16 से 18 मिनट का समय लगता है। नई AI प्रणाली में यह समय घटकर मात्र पांच से छह मिनट रह जाएगा। यह AI-सक्षम इंटरफेस, रियल-टाइम वॉयस-टू-टेक्स्ट टेक्नोलॉजी और संरचित प्रश्नावली के सहारे शिकायतकर्ता के तथ्यों को तुरंत रिकॉर्ड कर संबंधित डेटाबेस में अपडेट करेगा। इससे सूचना की सटीकता बढ़ेगी और टाइपो या ट्रांसक्रिप्शन से होने वाली त्रुटियां कम होंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। एआई आधारित सिस्टम होने से साइबर ठगी के पैटर्न का तत्काल विश्लेषण करने में आसानी होगी, साथ ही उन डिजिटल उपकरणों की पहचान हो सकेगी जिनसे बार-बार ठगी की जा रही है। भविष्य में पीड़ितों को बहुभाषी कॉल सेंटर की सेवा देने की भी योजना है, ताकि स्थानीय भाषाओं में भी शिकायत दर्ज करायी जा सके।

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बढ़ेगी क्षमता, मिलेगी तत्काल राहत

फरवरी में नई साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) के गठन के बाद 1930 पर आईवीआरएस (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें काउंसलर प्रश्न और प्राथमिक जानकारी स्वचालित रूप से लेते हैं, जैसे बैंक का नाम, खाता संख्या, ट्रांजेक्शन आईडी, घटना की तिथि और संदिग्ध की जानकारी। सीसीएसयू ने मौजूदा फोन लाइनों की संख्या को 25 से दोगुना कर 50 करने का लक्ष्य रखा है, जिससे कॉल वेटिंग में कमी आएगी। आईजी (साइबर) रंजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि फरवरी 2026 से आईवीआरएस लागू होने के बाद प्रतिदिन प्राप्त होने वाली औसत कॉल की संख्या 5500 से बढ़कर 8100 हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इसी तरह साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पंजीकरण के मामले भी औसतन 295 से बढ़कर 430 हो गए हैं। वित्तीय ठगी के मामलों में पहले दो घंटे ‘गोल्डन आवर’ होते हैं। शिकायत दर्ज होने से लेकर संबंधित एजेंसियों तक सूचना जल्द पहुंचने पर राशि होल्ड कराना आसान होता है।

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आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने पुष्टि की है कि बिहार के साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 को बिहार साइबर हेल्पलाइन AI से लैस किया जा रहा है। यह संभवत: देश का पहला एआई आधारित साइबर हेल्पलाइन होगा। इससे शिकायत दर्ज करने का समय घटेगा, वहीं कार्रवाई में भी तेजी आएगी और साइबर ठगी के पैटर्न को भी समझने में आसानी होगी।

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