मिड डे मील की गुणवत्ता: बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाने पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने इस पर नकेल कसने की ठान ली है। सीमांचल के चार जिलों के 120 स्कूलों में पकाए जा रहे मिड डे मील के नमूनों की अब दिल्ली की एक एजेंसी वैज्ञानिक तरीके से जांच करेगी, ताकि नौनिहालों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।
इन जिलों के स्कूलों में होगी जांच, 120 विद्यालयों का हुआ चयन
शिक्षा विभाग ने सीमांचल के चार जिलों- पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज के कुल 120 विद्यालयों में पकाए जा रहे भोजन के नमूनों की जांच कराने का फैसला लिया है। इसके लिए दिल्ली की एक एजेंसी को अधिकृत किया गया है। मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार, चारों जिलों के 30-30 विद्यालयों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
मिड डे मील की गुणवत्ता जांच के लिए सख्त निर्देश
मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि चयनित विद्यालयों से भोजन के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिस दिन विद्यालय में जो मेन्यू तय होगा, उसी दिन बनने वाले सभी खाद्य पदार्थों का नमूना लिया जाएगा। जांच रिपोर्ट में नमूना संग्रह की तारीख, विद्यालय का पूरा नाम और उस दिन का मेन्यू दर्ज करना अनिवार्य होगा। विभाग ने कहा है कि रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट और प्रमाणिक होनी चाहिए। यह कदम बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर भोजन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
रिपोर्ट में कमी पर एजेंसी को नहीं होगा भुगतान
शिक्षा विभाग ने एजेंसी को सख्त निर्देश दिया है कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर जांच रिपोर्ट में साफ टिप्पणी दर्ज की जाए। यदि रिपोर्ट अस्पष्ट, अधूरी या मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसे मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में एजेंसी को भुगतान भी नहीं किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। विभाग ने एजेंसी को निर्देश दिया है कि नमूना संग्रह के एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। साथ ही नमूना लेने के दौरान सभी निर्धारित मानकों और स्वीकृत प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा विभाग का यह कदम मिड डे मील की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा है। इससे स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले भोजन की नियमित निगरानी होगी और किसी भी तरह की लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकेगी।







