गया नगर निगम चुनाव: नगर निगम में सशक्त स्थायी समिति के सात सदस्यों के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आगामी 29 मई को जिला विकास अभिकरण भवन में मतदान होना है, लेकिन इससे पहले ही पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए गुप्त बैठकों और रणनीतियों का दौर शुरू हो चुका है। वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल भले ही लगभग एक वर्ष बचा हो, लेकिन इन सात महत्वपूर्ण पदों पर कब्जा जमाने के लिए संभावित प्रत्याशी पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
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पर्दे के पीछे तेज हुई जोड़तोड़ की राजनीति
गया नगर निगम की राजनीति इन दिनों पूरी तरह गरमा गई है। सुबह से लेकर देर रात तक पार्षदों से संपर्क साधने और उन्हें अपने खेमे में लाने की कोशिशें तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, कई संभावित प्रत्याशी लगातार बैठकों और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
नामांकन के दिन ही खुलेंगे प्रत्याशियों के पत्ते
फिलहाल किसी भी गुट ने अपने प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि मतदान वाले दिन सुबह नामांकन के लिए केवल दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है। ऐसे में अधिकांश प्रत्याशी अंतिम समय में ही मैदान में उतरने की रणनीति बना रहे हैं ताकि क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक खेमेबाजी से बचा जा सके। सूत्रों की मानें तो सशक्त स्थायी समिति के सात पदों के लिए करीब 14 संभावित प्रत्याशी ताल ठोक सकते हैं।
पुराने बनाम नए गुट की सीधी टक्कर
इस चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला पुराने और नए गुट के बीच माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार समिति के वर्तमान सातों सदस्य दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। वहीं दूसरी ओर, असंतुष्ट पार्षदों का एक नया गुट भी सभी सात सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहा है। कई पार्षदों ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार वे किसी दबाव में नहीं आने वाले हैं। उनका कहना है कि सरकार ने उन्हें अपनी मर्जी से चुनाव करने का अधिकार दिया है, इसलिए वे अपने विवेक और क्षेत्रहित को ध्यान में रखकर ही मतदान करेंगे।
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गया नगर निगम में इन सात सीटों के लिए होने वाला चुनाव न केवल मौजूदा समीकरणों को चुनौती देगा बल्कि भविष्य की राजनीति की दिशा भी तय करेगा। सभी की निगाहें 29 मई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।







