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Patna Fire Safety News: अस्पताल, होटल सावधान! सरकार का बड़ा फैसला, एक हफ्ते के अंदर पूरा करना होगा यह ‘ होमवर्क ’ नहीं तो… होगी बड़ी कार्रवाई! जानिए

अस्पतालों और होटलों में आग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए अग्निशमन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। तय समय में इलेक्ट्रिक लोड सर्टिफिकेट और गैस सिलेंडर की जानकारी न देने वाले निजी अस्पतालों व होटलों को बिना किसी नोटिस के सील कर दिया जाएगा, जिससे हजारों मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर है।

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Patna Fire Safety News: राज्य में अग्निशमन विभाग ने निजी अस्पतालों और होटलों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब सभी को एक सप्ताह के भीतर सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट देनी होगी। निर्धारित समय में जानकारी नहीं देने या गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे कार्रवाई की जाएगी, जिससे कई प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया है।

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अग्निशमन विभाग का कड़ा रुख: क्या होंगे नए नियम?

बिहार राज्य अग्निशमन सेवा की महानिदेशक शोभा ओहटकर ने गुरुवार को अपने कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक के बाद उन्होंने सभी निजी अस्पतालों और होटलों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश जारी किया है। इन आदेशों का सीधा असर हजारों प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जिनकी लापरवाही मरीजों और ग्राहकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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सभी निजी अस्पतालों को बिजली कंपनी द्वारा जांच करवाकर ‘इलेक्ट्रिक लोड एनालिसिस सर्टिफिकेट’ एक सप्ताह के भीतर जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, सभी होटलों को यह स्पष्ट रिपोर्ट देनी होगी कि उनके पास कुल कितने गैस सिलेंडर मौजूद हैं। इस जानकारी से आग से बचाव के उपायों का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा।

महानिदेशक शोभा ओहटकर ने चेतावनी दी है कि जो भी निजी अस्पताल या होटल एक सप्ताह के भीतर यह रिपोर्ट जमा नहीं करेंगे, या उनकी रिपोर्ट में कोई अनियमितता पाई जाएगी, उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के तत्काल सील कर दिया जाएगा। सभी जिला अग्निशमन पदाधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह फैसला बिहार हॉस्पिटल फायर जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोकने की दिशा में एक अहम कदम है।

अग्निशमन विभाग द्वारा सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों की लगातार फायर ऑडिट की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 7500 से अधिक अस्पतालों का ऑडिट किया गया था। इस दौरान कई अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, जिनके सुधार के लिए नोटिस भी जारी किए गए थे। विभाग अब इन नोटिसों के अनुपालन की भी जांच कर रहा है।

महानिदेशक ने बताया कि अस्पतालों में आग लगने की अधिकांश घटनाओं का मुख्य कारण अत्यधिक बिजली का भार (ओवरलोड) या शॉर्ट-सर्किट ही होता है। इसी वजह से इलेक्ट्रिक लोड एनालिसिस सर्टिफिकेट जमा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि संभावित खतरों को समय रहते टाला जा सके।

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मुजफ्फरपुर अग्निकांड: कैसे बची मरीजों की जान?

अग्निशमन विभाग के अनुसार, मुजफ्फरपुर के जिस प्रसाद अस्पताल में हाल ही में भीषण आग लगी थी, उसे अब सील करने की कार्रवाई की जाएगी। पिछले साल नवंबर में इस अस्पताल का भी फायर ऑडिट किया गया था। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि आग अधिक बिजली के लोड के कारण हुए शॉर्ट-सर्किट से लगी थी, जिसने पूरे अस्पताल में हड़कंप मचा दिया था।

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मुजफ्फरपुर के इस अस्पताल में आग लगने की घटना तड़के करीब 3 बजकर 55 मिनट पर हुई थी। अग्निशमन विभाग ने दावा किया कि सूचना मिलते ही उनकी टीम चार मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गई थी। राहत और बचाव कार्य के लिए छह फायर टेंडर के साथ 45 अग्निशमनकर्मी तैनात किए गए थे, जिन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला।

इस बचाव अभियान में पिछले महीने गांधी मैदान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा उद्घाटित हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अत्याधुनिक उपकरण की मदद से पांच मंजिला अस्पताल से मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। अग्निशमनकर्मियों ने कुल 23 मरीजों को सकुशल अस्पताल से बाहर निकालकर एक बड़ी आपदा को टाल दिया।

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हालांकि, कुछ दुर्भाग्यपूर्ण मौतें भी हुईं। जिन मरीजों की जान गई, वे आईसीयू में भर्ती थे और मेडिकल टीम आग लगने के बाद उन्हें छोड़कर भाग गई थी। यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये मरीज आग की लपटों से जलकर नहीं, बल्कि धुएं से दम घुटने के कारण काल के गाल में समा गए। यह घटना अस्पतालों में आपातकालीन प्रोटोकॉल की कमी और लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है।

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अग्निशमन सेवाओं की महानिदेशक शोभा ओहटकर ने पुनः दोहराया कि सभी निजी अस्पतालों को एक सप्ताह के भीतर इलेक्ट्रिक लोड एनालिसिस सर्टिफिकेट जमा करना होगा, और होटलों को भी अपने गैस सिलेंडरों की संख्या बतानी होगी। इन आदेशों का अनुपालन न करने वाले दोषी प्रतिष्ठानों को सीधे सील कर दिया जाएगा, ताकि राज्य में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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