Muzaffarpur Illegal Nursing Home News: मुजफ्फरपुर में एक बड़ी लापरवाही ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में, शहर के प्रमुख एसकेएमसीएच अस्पताल के ठीक बगल में अवैध रूप से संचालित हो रहे एक नर्सिंग होम पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान, मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं जब्त की गईं। यह घटना प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और स्वास्थ्य माफिया के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
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एसडीओ पूर्वी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम ने एसकेएमसीएच के आसपास के निजी नर्सिंग होम पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस अभियान के दौरान, ‘आयुष्मान हेल्थ केयर’ नामक एक नर्सिंग होम में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आईं। टीम को साल 2023 की एक्सपायरी डेट वाली बड़ी मात्रा में दवाएं मिलीं। इन दवाओं का इस्तेमाल सीधे तौर पर मरीजों के इलाज में किया जा रहा था, जो कि एक गंभीर अपराध है।
मौके की गंभीरता को देखते हुए, टीम ने तुरंत कार्रवाई की और नर्सिंग होम के संचालक सुधीर कुमार को हिरासत में ले लिया। कानूनी प्रक्रिया के तहत, सुधीर कुमार को आगे की कार्रवाई के लिए स्थानीय अहियापुर पुलिस को सौंप दिया गया। इस शुरुआती सफलता के बाद, यह उम्मीद की जा रही थी कि स्वास्थ्य माफिया के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे और अपराधियों को सबक मिलेगा।
पकड़े गए आरोपी की संदिग्ध रिहाई ने उठाए सवाल
हालांकि, स्थिति बिल्कुल विपरीत निकली। आरोपी को पुलिस के हवाले किए जाने के घंटों बाद भी, न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही औषधि नियंत्रण विभाग (ड्रग विभाग) के किसी अधिकारी ने अहियापुर थाने में कोई लिखित शिकायत दर्ज कराने की जहमत उठाई। विभागों की इस घोर निष्क्रियता ने पूरे मामले को कमजोर कर दिया।
दूसरी ओर, अहियापुर थाना पुलिस ने भी कानूनी विवशता का हवाला देते हुए सक्रियता दिखाने के बजाय चुप्पी साध ली। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बिना किसी लिखित आवेदन या प्राथमिकी (FIR) के वे आगे की कार्रवाई नहीं कर सकते थे। इसी कारण, नर्सिंग होम संचालक सुधीर कुमार को महज एक निजी मुचलके (PR Bond) पर थाने से ही रिहा कर दिया गया। यह घटना Expired Medicine News से जुड़े मामलों में प्रशासनिक ढिलाई का एक बड़ा उदाहरण है।
स्वास्थ्य माफियाओं के साथ सांठगांठ का बड़ा खुलासा
मुजफ्फरपुर में यह पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत या निष्क्रियता सामने आई हो। प्रसाद हॉस्पिटल अग्निकांड जैसी भीषण त्रासदी के बाद भी, जिले का स्वास्थ्य विभाग अपनी गहरी नींद से जागने को तैयार नहीं दिख रहा है। ऐसी घटनाएं लगातार प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिनभर कड़ी धूप में पसीना बहाकर की गई छापेमारी पर, उनके ही मातहतों की सुस्ती ने पानी फेर दिया। बिना प्राथमिकी के आरोपी की इतनी आसानी से रिहाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले में अवैध स्वास्थ्य कारोबारियों की जड़ें कितनी गहरी हैं। यह स्थिति विभागों के भीतर व्याप्त साठगांठ और भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने आम जनता में भारी रोष पैदा किया है। मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई न होना, न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को कम करता है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए कौन जिम्मेदार ठहराया जाता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
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