मुजफ्फरपुर गोविंद हत्याकांड: मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित गोविंद हत्याकांड मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की पड़ताल ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि कुख्यात अपराधी गोविंद शर्मा की हत्या के पीछे सुपारी और एक लंबी साजिश थी, जिसे अंजाम देने के लिए खास तौर पर शूटरों को लगाया गया था। इस मामले ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है और पुलिस अब बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
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मास्टरमाइंड और शूटरों की गिरफ्तारी, खुली साजिश की परतें
पुलिस जांच के अनुसार, मुजफ्फरपुर गोविंद हत्याकांड के मास्टरमाइंड छाजन संग्राम निवासी रविकांत उर्फ बाबुल चौधरी ने गोविंद शर्मा की हत्या के लिए पांच लाख रुपये की सुपारी दी थी। इस जघन्य वारदात को अंजाम देने के लिए साहेबगंज के परसौनी निवासी राजा सिंह और पारू थाना क्षेत्र के गरीबा गांव निवासी सौरभ उपाध्याय उर्फ बाला को शामिल किया गया था। बाबुल चौधरी और शूटर सौरभ उपाध्याय को दरभंगा एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसके बाद उनसे गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद नगर थाना पुलिस ने दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
मुख्य शूटर राजा सिंह की तलाश में पुलिस झारखंड सहित कई जगहों पर लगातार छापेमारी कर रही है, क्योंकि वह वारदात के बाद से फरार है। पुलिस को आशंका है कि वह झारखंड में छिपा हुआ है। राजा सिंह साहेबगंज के परसौनी गांव का रहने वाला है और उसके पिता अमीन का काम करते हैं। हत्या के बाद शूटरों को पनाह देने के आरोप में पुरानी गुदरी निवासी मनीष की गिरफ्तारी के लिए भी छापामारी जारी है।
हत्या की खौफनाक योजना: रेकी से लेकर शूटआउट तक
जांच में यह खुलासा हुआ है कि सौरभ उपाध्याय गोविंद शर्मा की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखता था। वह सिग्नल ऐप का इस्तेमाल कर बाबुल चौधरी को गोविंद के बारे में पल-पल की जानकारी देता था। इसी सूचना के आधार पर पूरी हत्या की योजना तैयार की गई थी। सौरभ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 2023 में उसे हथियार खरीदने थे और समस्तीपुर के निशांत के जरिए उसकी मुलाकात गोविंद शर्मा से हुई थी। गोविंद ने दो लाख रुपये में हथियार देने की बात कही थी, जिसके लिए सौरभ ने बैंक से कर्ज और दोस्तों से उधार लेकर एक लाख रुपये गोविंद को दिए, लेकिन गोविंद ने न तो हथियार दिया और न ही पैसे वापस किए।
सौरभ ने पुलिस को बताया कि अप्रैल 2026 में बनारस बैंक चौक पर उसकी मुलाकात बाबुल चौधरी से हुई थी। दोनों की पहचान रिश्ते के मामा अमित पांडेय उर्फ अंकित त्रिपाठी ने कराई थी। इस मुलाकात में बाबुल ने सौरभ से कहा कि अगर उसे उसके साथ रहना है, तो गोविंद को मारना होगा, वरना गोविंद उसे खत्म कर देगा। सौरभ अपनी प्रेमिका आयशा शेख की हत्या के लिए भी गोविंद को ही जिम्मेदार मानता था। इन सब कारणों से वह हत्या की साजिश में शामिल हो गया।
शुरू में 30 अप्रैल को पटना के नंदन अपार्टमेंट में गोविंद की हत्या की योजना बनी थी, लेकिन मौका नहीं मिला। इसके बाद बाबुल चौधरी ने उसे अमर सिनेमा रोड स्थित आइकॉन टावर में गोविंद के फ्लैट की जानकारी दी। योजना के तहत सौरभ ने उसी इमारत के चौथे तल पर फ्लैट नंबर 506 किराए पर ले लिया, जिसका पूरा खर्च बाबुल चौधरी उठा रहा था। 8 मई को बाबुल चौधरी ने सौरभ को पांच सिम कार्ड, दो कीपैड मोबाइल और एक एंड्रॉयड फोन उपलब्ध कराए। 30 मई की रात को बाबुल और वैभव ने सौरभ को चार पिस्तौल से भरा बैग और एक स्कूटी सौंपी। सौरभ ने फ्लैट में पहुंचकर पिस्तौलें कारतूसों से भरीं और उन्हें तोशक के नीचे छिपा दिया।
हत्या की रात बाबुल चौधरी ने दोनों शूटरों के लिए चिकन, शराब और नकद रुपये भेजे। दोनों ने खाना खाया और गोविंद के आने का इंतजार करने लगे। रात करीब 9:50 बजे राजा सिंह ने सौरभ को सूचना दी कि गोविंद की स्विफ्ट डिजायर कार आइकॉन टावर परिसर में प्रवेश कर चुकी है। गोविंद कार पार्क करके जैसे ही सीढ़ियों की ओर बढ़ा, तीसरी मंजिल से सौरभ और दूसरी मंजिल से राजा सिंह ने उस पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पहली गोली गोविंद के सीने में लगी। घायल होने के बावजूद वह जान बचाने के लिए बेसमेंट की ओर भागा। दोनों शूटर उसका पीछा करते हुए नीचे पहुंचे।
सौरभ के अनुसार, चार गोलियां लगने के बाद भी गोविंद ने उसका गला पकड़ लिया था। एक हाथ से गोविंद सौरभ का गला दबा रहा था और दूसरे हाथ से गार्ड की कुर्सी उठाकर हमला कर रहा था। इस दौरान सौरभ की पिस्तौल बार-बार मिसफायर हो रही थी। उसने राजा सिंह को मदद के लिए आवाज दी, जिसके बाद राजा सिंह ने गोविंद के सिर में गोली मार दी। गोविंद के गिरने के बाद उसके सिर, कान, गाल और सीने पर कई गोलियां दागी गईं।
गिरफ्तारी और अपराध की दुनिया का सफर
हत्या के बाद दोनों शूटर स्कूटी से भाग निकले। अमर सिनेमा रोड में बाबुल चौधरी उनका इंतजार कर रहा था। उसने सभी मोबाइल और सिम कार्ड अपने कब्जे में ले लिए। इसके बाद वे पुरानी गुदरी स्थित मनीष के घर पहुंचे, जहां चारों हथियार छत पर मच्छरदानी में लपेटकर छिपा दिए गए। घटना के समय पहने गए कपड़े भी फेंक दिए गए थे। सौरभ ने बताया कि वारदात के अगले दिन वह बैरिया बस स्टैंड से बस पकड़कर पटना चला गया। बाद में उसे पता चला कि मामले में बाबुल चौधरी का नाम सामने आ चुका है, जिसके बाद वह नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन रक्सौल बॉर्डर बंद होने के कारण वह रेलवे स्टेशन के पास रुक गया, वहीं पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
सौरभ स्नातक तक पढ़ा है। उसके एक चाचा इंडोनेशिया में इंजीनियर हैं, जबकि दूसरे चाचा गांव में किराना दुकान चलाते हैं। पुलिस के अनुसार, उसे महंगे कपड़ों और गाड़ियों का शौक था। इसी शौक के कारण वह 2021 में पहली बार बैंक डकैती के मामले में गिरफ्तार हुआ था। जेल से बाहर आने के बाद उसने कुछ समय फाइनेंस कंपनी में काम किया, लेकिन जल्द ही बिहार अपराध समाचार की दुनिया में लौट गया। बाबुल चौधरी ने पूछताछ में बताया कि हत्या के बाद उसने राजा सिंह को 25 हजार रुपये दिए थे। हथियार ठिकाने लगाने के बाद वह अपने दोस्त राजा साहू के साथ समस्तीपुर जिले के ताजपुर स्थित ननिहाल गया और फिर सिलिगुड़ी चला गया। जब उसे पता चला कि प्राथमिकी में उसका नाम आ चुका है, तो वह वहां से भागकर दरभंगा पहुंचा और कहीं और निकलने की तैयारी कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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बाबुल चौधरी ने पुलिस को बताया कि मिठनपुरा स्थित मददानी गली की तीन कट्ठा जमीन के मामले में गोविंद शर्मा उससे 25 लाख रुपये और 10 धुर जमीन की मांग कर रहा था। इसके अलावा कलमबाग चौक स्थित 15 कट्ठा जमीन और विश्वविद्यालय क्षेत्र में उसकी ठेकेदारी छोड़ने का भी दबाव बनाया जा रहा था। बाबुल का आरोप है कि गोविंद ने उसकी हत्या के लिए भी शूटर लगा रखा था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और फरार शूटर राजा सिंह तथा अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
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