Darbhanga AIIMS News: बिहार के दरभंगा जिले में प्रस्तावित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निर्माण कार्य में अप्रत्याशित देरी और कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर अब नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक दलों ने कड़ा रुख अपनाया है। एम्स के निर्माण में तेजी लाने की मांग को लेकर 29 जून से एक बड़ा सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया गया है। यह घोषणा सिमरी थाना क्षेत्र के शोभन चौक पर आयोजित एक जागरूकता सम्मेलन के दौरान की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।
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एम्स निर्माण में देरी पर जनता का आक्रोश
नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में सरकार से दरभंगा एम्स के निर्माण कार्य को अविलंब पूरा करने और जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग की। वक्ताओं ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 13 नवंबर, 2024 को एम्स का शिलान्यास किया गया था। उस समय यह वादा किया गया था कि तीन वर्षों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर चिकित्सा सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी, लेकिन अब तक इसमें अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। यह स्थिति बिहार हेल्थ न्यूज के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि राज्य को एक और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा की सख्त आवश्यकता है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि एम्स निर्माण के नाम पर अब तक केवल एक प्रवेश द्वार बनाकर कार्य प्रगति का प्रदर्शन किया जा रहा है। यह स्थिति परियोजना की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि एम्स जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार भी सामने आ रहे हैं, जिससे जनता का विश्वास डगमगा रहा है। दरभंगा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को इस एम्स से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा स्थिति ने उन्हें निराश किया है।
सत्याग्रह आंदोलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
शोभन में आयोजित इस जागरूकता सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एम्स निर्माण में हो रही देरी के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। नागरिक समाज और विभिन्न राजनीतिक संगठनों ने मिलकर इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। 29 जून से शुरू होने वाला यह सत्याग्रह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने का एक प्रयास है, ताकि एम्स का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो सके। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह एम्स न केवल दरभंगा बल्कि पूरे उत्तर बिहार के लिए एक जीवनरेखा साबित होगा, जहां उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी है।
सम्मेलन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के जिला सचिव नारायण जी झा, सहायक जिला सचिव राजीव चौधरी, सीपीआई (एम) के जिला सचिव मंटुन ठाकुर, दिलीप भगत, बैजनाथ यादव, भाकपा माले के सुरेंद्र पासवान, राजद नेता प्रो राहत अली और प्रो विनोद कुमार साह जैसे प्रमुख नेताओं ने संबोधित किया। इन सभी नेताओं ने एम्स निर्माण में देरी को लेकर सरकार की निष्क्रियता पर गहरी चिंता व्यक्त की और जनता से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एम्स का निर्माण केवल एक इमारत बनाना नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप
सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने एम्स परियोजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंकाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस गति से काम चल रहा है, वह संतोषजनक नहीं है और इससे परियोजना की लागत बढ़ने के साथ-साथ इसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ सकते हैं। लोगों को डर है कि कहीं यह परियोजना भी अन्य सरकारी परियोजनाओं की तरह सालों तक अटकी न रह जाए। एक प्रवेश द्वार के निर्माण को ही ‘प्रगति’ बताना हास्यास्पद है, जबकि मुख्य अस्पताल भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा अभी भी अधूरा है। इस तरह की देरी से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि क्षेत्र की जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में भी बाधा आ रही है।
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यह आंदोलन केवल एम्स के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की उन नीतियों के खिलाफ भी एक आवाज है जो विकास परियोजनाओं को लटकाने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम करती हैं। नेताओं ने कहा कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक दरभंगा एम्स का निर्माण पूरा नहीं हो जाता और यह पूरी तरह से कार्यशील नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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दरभंगा एम्स का सपना उत्तर बिहार के करोड़ों लोगों ने देखा है। यह परियोजना क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकती है। ऐसे में इसके निर्माण में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही अक्षम्य है। नागरिक समाज और राजनीतिक दलों का यह संयुक्त सत्याग्रह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक मजबूत कदम है, और उम्मीद है कि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा, जिससे दरभंगा को उसका बहुप्रतीक्षित एम्स मिल सकेगा।








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