East Champaran Sadak News: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में एक नवनिर्मित सड़क और पुलिया में काम पूरा होने के महज 60 दिनों के भीतर ही बड़ी दरारें और संरचनात्मक क्षति होने से सरकारी निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह परियोजना मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना के तहत बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य गांवों के बीच परिवहन को बेहतर बनाना था।
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East Champaran Sadak News: ग्रामीणों में आक्रोश, बढ़ी दुर्घटना का खतरा
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़क की सतह पर बड़ी दरारें आ गई हैं, जबकि पुलिया का एक हिस्सा भी काफी क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग की बिगड़ती स्थिति ने यात्रियों के लिए दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा दिया है। प्रभावित स्ट्रेच परसाउनी और बोकाने गांवों को जोड़ता है। शिव मंदिर से रामपुर मनोरथ तक लगभग 1.8 किलोमीटर लंबी यह सड़क हाल ही में बनाई गई थी। निवासियों ने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद उन्हें बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यात्रा की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही हफ्तों में बुनियादी ढांचा खराब होने लगा।
ठेकेदार पर घटिया निर्माण सामग्री के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी पर लापरवाही और घटिया निर्माण का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क और पुलिया दोनों के निर्माण के दौरान निम्न-गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप समय से पहले ही क्षति हो गई। उनका तर्क है कि ठीक से निष्पादित परियोजना दो महीने के भीतर खराब नहीं होती। निवासियों ने परियोजना की पारदर्शिता के अभाव पर भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि निर्माण स्थल पर लगे सरकारी सूचना बोर्ड पर योजना की कुल लागत का उल्लेख नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक व्यय का विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
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अधिकारियों का बयान और ग्रामीणों की मांग
विभागीय अधिकारियों ने दोषपूर्ण निर्माण के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि क्षतिग्रस्त पुलिया नई नहीं बनी थी। अधिकारियों के अनुसार, पुलिया पहले से मौजूद थी और सड़क निर्माण परियोजना के हिस्से के रूप में केवल मरम्मत का काम किया गया था। उन्होंने दावा किया कि क्षति भारी वाहनों की आवाजाही के कारण हुई है। ग्रामीणों ने विभाग के स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कहा कि यदि पुलिया पहले से ही कमजोर स्थिति में थी, तो अधिकारियों को सड़क परियोजना शुरू करने से पहले उसका आकलन और सुदृढीकरण करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि क्षति का दोष केवल भारी वाहनों पर मढ़ने से योजना और निष्पादन से संबंधित चिंताओं का समाधान नहीं होता है। इस घटना से निवासियों में गुस्सा है, जिनका कहना है कि घटिया कार्यान्वयन सरकारी विकास योजनाओं के उद्देश्य को कमजोर करता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है ताकि यह पता चल सके कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान अनियमितताएं हुईं या नहीं और क्षति के लिए जवाबदेही तय की जा सके।
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