Patna RJD News: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। विधान परिषद का टिकट नहीं मिलने से आहत शिवचंद्र राम का इस्तीफा पार्टी ने नामंजूर कर दिया है। यह फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने लिया है, जिसके बाद शिवचंद्र राम पार्टी में बने रहेंगे और अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। इस घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में खासा हड़कंप मचा दिया था।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस्तीफे के बाद भावुक हुए शिवचंद्र राम
बता दें कि एक दिन पहले शिवचंद्र राम ने राजद के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने अपनी उपेक्षा और मान-सम्मान न मिलने का गंभीर आरोप लगाया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे काफी भावुक हो गए थे और फूट-फूटकर रोने लगे थे। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद उनकी तबीयत भी बिगड़ गई थी, जिसके चलते उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों की देखरेख में इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया था।
शिवचंद्र राम राजद के उन पुराने और वफादार सिपाहियों में से एक हैं, जिन्होंने पार्टी के गठन से लेकर अब तक लंबा सफर तय किया है। उनकी पहचान सामाजिक न्याय के मूल्यों में अटूट आस्था रखने वाले नेता के तौर पर होती है, जिन्होंने गरीब और वंचितों की आवाज बुलंद की है। पार्टी के कई महत्वपूर्ण अभियानों और आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।
लालू प्रसाद यादव का अहम फैसला और पार्टी की प्रतिक्रिया
राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि शिवचंद्र राम ने कुछ प्रतिक्रियाएं देते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके तुरंत बाद पार्टी के मुख्य सचेतक कुमार सर्वजीत और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने शिवचंद्र राम से बातचीत की। उन्होंने शिवचंद्र राम को समझाया-बुझाया और पार्टी के प्रति उनकी वर्षों पुरानी निष्ठा व समर्पण को सराहा। पार्टी के नेताओं ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनका योगदान हमेशा मूल्यवान रहा है।
अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने लिया। उन्होंने शिवचंद्र राम के त्यागपत्र को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट कर दिया कि वे पूर्व की भांति मजबूती के साथ पार्टी में अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। पार्टी ने कहा कि शिवचंद्र राम सामाजिक न्याय के मूल्यों में गहरी आस्था रखते हैं और उनका योगदान हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। यह फैसला राजद में एकता और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान को बनाए रखने का संदेश देता है, जिससे पार्टी के भीतर के असंतोष को शांत करने में मदद मिली है।
सियासी घमासान और विरोधियों की एंट्री
सोमवार को इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद Bihar Politics News में गरमाहट तेज हो गई थी। उसी दिन राजद के उम्मीदवार के रूप में डॉ. सुनील कुमार सिंह ने विधान परिषद के लिए नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी पर लालू परिवार के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने डॉ. सुनील कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सवाल उठाए थे।
शिवचंद्र राम के इस्तीफे की घोषणा के बाद तेज प्रताप यादव ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी पार्टी जनशक्ति जनता दल शिवचंद्र राम के साथ खड़ी है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी इस मामले में कूद पड़े थे। उन्होंने शिवचंद्र राम के बहाने राजद और उसके नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा था, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई थी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनीति में हर फैसला कई मोर्चों पर असर डालता है और विरोधियों को हमला करने का मौका देता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
शिवचंद्र राम का इस्तीफा नामंजूर होने के बाद राजद में एक बड़े संकट को टाल दिया गया है। यह घटना पार्टी के भीतर असंतोष को संभालने और वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखने की राजद की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। लालू प्रसाद यादव के इस कदम ने पार्टी कार्यकर्ताओं में एक सकारात्मक संदेश दिया है कि वरिष्ठ नेताओं के त्याग और समर्पण को महत्व दिया जाता है। आने वाले समय में देखना होगा कि इस फैसले का पार्टी की एकजुटता पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






