Patna Climate News: यूनिसेफ ने चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट पटना (CIMP) के साथ मिलकर बिहार में जलवायु परिवर्तन, जल, स्वच्छता और हाईजीन (WASH) तथा सामुदायिक लचीलेपन पर एक महत्वपूर्ण मीडिया संवाद और कार्यशाला का आयोजन किया है। इस पहल का उद्देश्य मीडिया पेशेवरों, जनसंचार छात्रों और WASH विशेषज्ञों के बीच जलवायु परिवर्तन और आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के अंतर्संबंधों की समझ को मजबूत करना है, ताकि साक्ष्य-आधारित और समाधान-उन्मुख संचार को बढ़ावा दिया जा सके।
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जलवायु परिवर्तन का WASH प्रणालियों पर प्रभाव
इस संवाद में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे जलवायु परिवर्तन बिहार में WASH प्रणालियों से संबंधित चुनौतियों को बढ़ा रहा है। इसमें लचीली नीतियों और प्रथाओं का समर्थन करने के लिए सूचित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों ने जन जागरूकता बढ़ाने में मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा की, जिसमें बुनियादी ढांचे से परे सामुदायिक जागरूकता और प्रभावी संचार को शामिल करने पर जोर दिया गया।
प्रमुख वक्ताओं ने क्या कहा?
कार्यशाला में यूनिसेफ की चीफ फील्ड ऑफिसर मोनिका नील्सन, यूनिसेफ के WASH अधिकारी सुधाकर रेड्डी, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत, वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) के संचार प्रबंधक पीयूष त्रिपाठी, सीआईएमपी के निदेशक प्रो. डॉ. राणा सिंह और सीआईएमपी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कुमोद कुमार जैसे प्रमुख वक्ता शामिल रहे। प्रो. डॉ. राणा सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि जलवायु परिवर्तन बिहार में WASH और लचीलेपन के लिए गंभीर चुनौतियां पेश करता है और मीडिया पेशेवरों व छात्रों द्वारा समाधान-उन्मुख कहानी कहने के महत्व पर जोर दिया। मोनिका नील्सन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक तात्कालिक वास्तविकता है जो स्वास्थ्य, आजीविका और पोषण को प्रभावित कर रही है, जिसमें बच्चे और महिलाएं सबसे कमजोर समूहों में से हैं।
Patna Climate News: समाधान और भविष्य की राह
कार्यशाला में बिहार में उभरते जलवायु जोखिमों, WASH प्रणालियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और साक्ष्य-आधारित रिपोर्टिंग में मीडिया की भूमिका पर सत्र शामिल थे। चर्चाओं में जलवायु-लचीले विकास का समर्थन करने और सामुदायिक जागरूकता में सुधार के लिए संचार रणनीतियों को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य WASH सेवाओं पर जलवायु प्रभावों की समझ बढ़ाना, लचीलेपन की कहानियों को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका को मजबूत करना और बिहार में जलवायु संबंधी मुद्दों पर केंद्रित संचारकों का एक नेटवर्क बनाना था।
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कुमोद कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह वितरित किए। उन्होंने कहा कि सकारात्मक बदलाव लाने और जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने के लिए संस्थानों, मीडिया और चिकित्सकों के बीच सहयोग आवश्यक है। कार्यशाला का समापन पत्रकारों, शिक्षाविदों और विकास चिकित्सकों के बीच निरंतर जुड़ाव के आह्वान के साथ हुआ, ताकि राज्य में जलवायु और WASH चुनौतियों पर सूचित संचार का समर्थन किया जा सके।
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