Sasaram Police Training News: बिहार के रोहतास जिले में स्थित डेहरी ऑन सोन के बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी-2) कैंप से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। महिला पुलिस बल के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आयोजित की गई 16 किलोमीटर की लंबी दौड़ में एक साथ 16 महिला प्रशिक्षुओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे पूरे प्रशिक्षण केंद्र में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। इस घटना ने एक बार फिर प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा और मौसम संबंधी सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दौड़ के मध्य में ही कई प्रशिक्षु महिलाओं को असहजता महसूस होने लगी। कुछ को अचानक चक्कर आने लगे, जबकि अन्य ने पेट में तेज दर्द, घबराहट और सांस लेने में भारी दिक्कत की शिकायत की। देखते ही देखते कुछ प्रशिक्षु जमीन पर गिरकर बेहोश हो गईं, जिससे मौके पर मौजूद अन्य प्रशिक्षु और अधिकारी भी सकते में आ गए। यह घटना भीषण गर्मी के प्रकोप को उजागर करती है, जिसने युवा प्रशिक्षुओं को अपनी चपेट में ले लिया।
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Sasaram Police Training News: घटना का पूरा विवरण
घटना की गंभीरता को भांपते हुए, तत्काल मौके पर मौजूद प्रशिक्षण अधिकारियों और अन्य सुरक्षा कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई की। सभी प्रभावित प्रशिक्षुओं को बिना देर किए एंबुलेंस के माध्यम से डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बताया कि यह घटना पूरी तरह से अत्यधिक गर्मी और लू के प्रभाव का परिणाम है।
अस्पताल में भर्ती कराई गईं महिला प्रशिक्षुओं में से चार की हालत अत्यधिक गंभीर बताई गई। प्राथमिक उपचार और शुरुआती निगरानी के बाद, उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए, उन्हें बेहतर और विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए सासाराम के सदर अस्पताल और जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर कर दिया गया। शेष अन्य प्रशिक्षुओं का इलाज अभी भी डेहरी अनुमंडलीय अस्पताल में जारी है, जबकि कुछ को मामूली उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर वापस कैंप भेज दिया गया है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से कुल 1358 महिला प्रशिक्षुओं ने भाग लिया है। इन सभी को निर्धारित शारीरिक दक्षता परीक्षण के एक भाग के रूप में 16 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी। यह दौड़ एक कठोर शारीरिक अभ्यास माना जाता है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य भीषण गर्मी और लू की चपेट में हो।
बिहार में भीषण गर्मी और प्रशिक्षण पर उठते गंभीर सवाल
डेहरी स्थित बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी-2) कैंप में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। पहले भी भीषण गर्मी के बीच आयोजित शारीरिक प्रशिक्षण के दौरान कई प्रशिक्षु जवानों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिसने पहले भी चिंताएं बढ़ाई थीं। Bihar Heatwave News के अनुसार, वर्तमान में राज्य के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन के साथ-साथ सुरक्षा कर्मियों के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अत्यधिक तापमान में, खासकर दोपहर के समय, लंबी दौड़ जैसे कठोर शारीरिक अभ्यास करवाना स्वास्थ्य के लिए बेहद जोखिम भरा हो सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संशोधित किया जाना चाहिए या फिर इन्हें कम तापमान वाले समय में आयोजित किया जाए। लगातार ऐसी घटनाओं का सामने आना प्रशिक्षण व्यवस्था और उसमें बरती जा रही सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पहले भी हुई थी ऐसी दर्दनाक घटना, अब क्या करेगा प्रशासन?
इस घटना ने एक दुखद अतीत की याद दिला दी है। इसी तरह की एक दर्दनाक घटना में, पहले समस्तीपुर जिले के पटोरी थाना क्षेत्र के चांदपुर गांव निवासी प्रशिक्षु सिपाही श्रीराम कुमार की भी तबीयत बिगड़ गई थी। प्रशिक्षण के दौरान उनकी हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर बेहतर चिकित्सा के लिए पटना एम्स रेफर कर दिया गया।
पटना एम्स में लंबे इलाज के बावजूद, श्रीराम कुमार की जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के दौरान उनकी दुखद मौत हो गई थी। इस घटना से उनके परिवार में गहरा शोक छा गया था और पूरे पुलिस विभाग में भी दुख की लहर दौड़ गई थी। आज की घटना फिर से उस भयावह अनुभव को दोहरा रही है, जब प्रशिक्षण के दौरान एक जवान ने अपनी जान गंवा दी थी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा इंतजामों, मेडिकल सुविधाओं की उपलब्धता और गर्मी जैसे प्राकृतिक कारकों को ध्यान में रखते हुए कठोर शारीरिक अभ्यासों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल, कैंप प्रशासन और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की गहन समीक्षा में जुटे हुए हैं। उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह की अप्रिय घटनाओं से बचाव के लिए वे आवश्यक और ठोस कदम उठाएंगे। प्रशासन पर दबाव है कि वह जल्द ही कोई स्थायी समाधान प्रस्तुत करे।
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राज्य में गर्मी का प्रकोप जारी है और ऐसे में जवानों व प्रशिक्षुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करते समय मौसम की स्थिति और मानवीय क्षमताओं का विशेष ध्यान रखना ही एकमात्र रास्ता है। यह सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए कि किसी भी जवान या प्रशिक्षु को अपनी जान जोखिम में डालकर प्रशिक्षण न लेना पड़े। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







