बिहार में शराबबंदी कानून के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर अब राज्य सरकार के भीतर से ही गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और शराबबंदी की वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके इस बयान ने प्रशासनिक समन्वय और कानून के सख्त पालन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
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DGP से संपर्क न होने पर मंत्री ने उठाए सवाल
मंत्री मदन सहनी ने दावा किया है कि उन्होंने शराबबंदी के विषय पर चर्चा करने के लिए लगातार तीन दिनों तक राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि, उनके अनुसार, न तो डीजीपी ने उनका फोन उठाया और न ही बाद में कोई कॉल बैक किया। मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में एक कथित गांजा तस्कर के वाहन को पुलिस वाहन द्वारा एस्कॉर्ट दिए जाने का मामला खूब चर्चा में रहा था, जिसने पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए थे।
सहनी ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में शराबबंदी को पूरी तरह सफल बनाने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि शीर्ष स्तर पर इस कानून की नियमित समीक्षा की जाए और पुलिस विभाग इसे गंभीरता से ले, तो इसके कार्यान्वयन में अधिक प्रभावी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
शराबबंदी पर क्यों उठ रहे हैं गंभीर प्रश्न?
एक निजी चैनल से बातचीत के दौरान मदन सहनी ने बताया कि शराबबंदी को लेकर आम जनता के बीच लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि राज्य के कई हिस्सों में अवैध शराब की बरामदगी और तस्करी के मामलों में समय-समय पर पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता के आरोप भी लगते रहे हैं। मंत्री के अनुसार, यह कोई नई बात नहीं है, फिर भी सरकार और संबंधित विभाग स्थिति को सुधारने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
मंत्री ने 11 जून को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक का भी जिक्र किया, जो शराबबंदी कानून की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। इस बैठक में रेलवे, एयरपोर्ट और सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। सहनी चाहते थे कि पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी भी इसमें शामिल हों, ताकि शराबबंदी के कार्यान्वयन और पुलिस के सहयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हो सके, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनके मुताबिक, कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठकों में शराबबंदी को भी एक प्रमुख एजेंडा बनाया जाना चाहिए। यदि पुलिस विभाग नियमित रूप से इस विषय की निगरानी करे और अपनी जिम्मेदारियों को तय करे, तो अवैध शराब के व्यापार पर अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रण किया जा सकता है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर मंत्री ने क्या कहा?
मद्य निषेध मंत्री ने बातचीत के दौरान बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राज्य में विदेशी और देसी शराब की लगातार बरामदगी यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कानून लागू होने के बावजूद अवैध गतिविधियां पूरी तरह से नहीं रुक पाई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आम नागरिकों, खासकर महिलाओं के बीच यह धारणा बन रही है कि कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण शराबबंदी का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में Bihar Police News के अंतर्गत इस तरह के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं।
मदन सहनी ने याद दिलाया कि शराबबंदी को लागू करने का निर्णय मुख्य रूप से महिलाओं की मांग और बड़े सामाजिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया था। इसलिए, यदि इस कानून के कार्यान्वयन में कहीं भी कोई कमी है, तो उसकी गहन समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के कुछ मामलों में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है, जिससे यह मुद्दा और भी अधिक संवेदनशील हो गया है।
मंत्री के उस बयान की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, जिसमें उन्होंने लगातार तीन दिनों तक डीजीपी से संपर्क करने की असफल कोशिश का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य शराबबंदी के प्रभावी कार्यान्वयन और विभागीय समन्वय पर चर्चा करना था। इस बयान को प्रशासनिक स्तर पर संवाद और समन्वय की मौजूदा स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। मद्य निषेध विभाग, सीमित संसाधनों और कम कर्मियों के बावजूद लगातार कार्रवाई कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कई बरामदगियां और गिरफ्तारियां हुई हैं। इससे यह साबित होता है कि विभाग के अधिकारी निरंतर काम कर रहे हैं। हालांकि, मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शराबबंदी को पूरी तरह सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी और एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल अत्यंत आवश्यक है।
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मंत्री के इस बयान ने बिहार में शराबबंदी की मौजूदा चुनौतियों और प्रशासनिक मशीनरी के भीतर समन्वय की कमी को उजागर किया है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।







