Bihar Development: बिहार में विकास की नई इबारत लिखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर जिले के उदवंतनगर प्रखंड स्थित नवादाबेन वाणासुर में 31 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले समेकित एक्वा पार्क का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मनेर में बैराज निर्माण, सोन नदी के जल बंटवारे, सिंचाई विस्तार, बाढ़ नियंत्रण और रोजगार सृजन को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मनेर बैराज के बनने से सोन नदी का वह जल, जो सीधे गंगा में प्रवाहित हो जाता है, उसे संग्रहित कर कृषि कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
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सोन नदी के जल बंटवारे पर अहम फैसला
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें यह तय हुआ कि सोन नदी के जल का दो-तिहाई हिस्सा बिहार को और एक-तिहाई हिस्सा झारखंड को प्राप्त होगा। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बिहार की सिंचाई व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित होगा।
मत्स्य पालन से बढ़ेगा रोजगार और आय
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य सरकार मत्स्य पालन को केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एक बड़े आधार के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले मछली उत्पादन मुख्य रूप से उत्तर बिहार तक ही सीमित था, लेकिन अब इसका विस्तार राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, बिहार मछली उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है और पड़ोसी राज्यों की मांग को भी पूरा करने की क्षमता विकसित कर रहा है। 31 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला समेकित एक्वा पार्क मछली उत्पादन, अनुसंधान और प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। सरकार इसे जलीय पर्यटन और एक्वा रिसर्च हब के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इस परियोजना में आधुनिक हैचरी, बायो-फ्लॉक तकनीक, फिश फीड यूनिट और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां छात्रावास भी बनाए जाएंगे, जहां मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बाढ़ नियंत्रण और सस्ती बिजली पर भी जोर
केंद्रीय मत्स्य पालन एवं पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, इस एक्वा पार्क से लगभग 100 लोगों को प्रत्यक्ष और 300 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। यह स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या का भी जिक्र किया और दावा किया कि आगामी वर्षों में बाढ़ नियंत्रण के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में विकसित होने वाला मरीन ड्राइव न केवल आरा और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क देगा, बल्कि बाढ़ से सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। ऊर्जा क्षेत्र पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश के उन राज्यों में शामिल है जहां उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा दी जा रही है और आने वाले समय में सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था को और व्यापक बनाया जाएगा। प्रशासनिक सख्ती के संकेत देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनता के कार्यों के प्रति जवाबदेह बनाने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर नए अवैध निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और कानून व्यवस्था को लेकर अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संकेत दिया।
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इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, उच्च शिक्षा एवं विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, श्रम संसाधन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम, सांसद सुदामा प्रसाद सहित कई जनप्रतिनिधि और मत्स्य एवं पशुपालन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसे क्षेत्रीय विकास की एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जिससे बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।







