
Samastipur News: बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस ने एक बड़े मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह कथित तौर पर नेटवर्क मार्केटिंग की आड़ में युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर बंधक बनाता था और उनसे जबरन काम करवाता था। इस कार्रवाई में पुलिस ने 105 युवक-युवतियों को सुरक्षित मुक्त कराया है, जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं।
सरकारी नौकरी का झांसा, फिर बंधक बनाकर काम
पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि जिले में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर युवाओं को धोखे से लाकर उनसे जबरन काम कराया जा रहा है। इस जानकारी की पुष्टि के लिए साइबर थाना और नगर थाना की टीमों ने गहन जांच की, जिसमें शुरुआती तौर पर यह बात सही पाई गई। बाद में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से 17 जून 2026 को प्राप्त निर्देश के बाद समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक ने साइबर क्राइम डीएसपी दुर्गेश दीपक के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित करने का आदेश दिया। इस टीम ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दुधपुरा और मुसापुर इलाकों में घेराबंदी कर छापेमारी की।




जांच के दौरान यह सामने आया कि ‘लीड विजन ट्रेडिंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ (जो गैलवे के रूप में संचालित हो रही थी) नामक कंपनी सरकारी नौकरी का प्रलोभन देकर युवाओं को यहां लाती थी। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर कैद जैसी परिस्थितियों में रखकर नेटवर्क मार्केटिंग का काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। मुक्त कराए गए 105 पीड़ितों में बिहार के विभिन्न जिलों के साथ-साथ असम और पश्चिम बंगाल के युवक-युवतियां भी शामिल हैं। इनमें कई नाबालिग भी थे, जिनकी पहचान की जा रही है।
समस्तीपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई और आगे की जांच
इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बिहार पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 259/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम (JJ एक्ट) और बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम (चाइल्ड एंड एडोलसेंट लेबर एक्ट) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इस बड़े छापेमारी अभियान में साइबर क्राइम डीएसपी के अलावा मुफस्सिल थाना, महिला थाना, मथुरापुर थाना, एससी/एसटी थाना और साइबर थाना के पुलिस अधिकारी तथा लगभग 80 पुलिसकर्मी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और रेस्क्यू रिलीफ फाउंडेशन के सदस्यों ने भी इस महत्वपूर्ण अभियान में सहयोग किया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह का दायरा कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कितने अन्य लोग शामिल हैं। इस मामले में आगे भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।






