
Bihar Land Records: बिहार के आम नागरिकों को अब जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी घर बैठे ही देखने और डाउनलोड करने की अभूतपूर्व सुविधा मिल गई है। बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने यह बड़ी पहल की है, जिससे राज्यभर के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिली है। फिलहाल यह व्यवस्था 1996 से 2026 तक की अवधि में निबंधित हुए सभी दस्तावेजों पर लागू है। इस अवधि के सभी दस्तावेज विभाग के पोर्टल पर पूरी तरह से अपलोड किए जा चुके हैं।
इस महत्वपूर्ण कदम के तहत, 2006 से 2024 तक के लगभग 47 लाख 55 हजार दस्तावेजों के पीडीएफ सफलतापूर्वक अपलोड कर दिए गए हैं। यह सुविधा भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और पुराने निबंधित अभिलेखों के संरक्षण के लिए विभाग की तेज गति से चल रही डिजिटलीकरण प्रक्रिया का हिस्सा है। अब आम लोग इन दस्तावेजों की सर्टिफाइड कॉपी को आसानी से ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं, जिससे कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत खत्म हो गई है।




पुराने रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण भी जारी, जल्द मिलेगी सुविधा
विभाग केवल हालिया दस्तावेजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 1908 से 1995 तक की अवधि के बेहद पुराने दस्तावेजों का भी तेजी से डिजिटलीकरण कर रहा है। इस अवधि के कुल 5 करोड़ 28 लाख दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया जाना है। इनमें से 8 लाख 40 हजार दस्तावेज पूरी तरह से डिजिटाइज्ड हो चुके हैं, जबकि 4 करोड़ 29 लाख दस्तावेजों के पीडीएफ तैयार कर लिए गए हैं, और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
10 एजेंसियां सक्रिय, पारदर्शिता की नई मिसाल
पुराने दस्तावेजों के डिजिटलीकरण के इस वृहद कार्य के लिए वर्तमान में 10 एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी रिकॉर्ड्स को व्यवस्थित तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। डिजिटलीकरण की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद, 1908 से 1995 तक के ये सभी ऐतिहासिक दस्तावेज भी आमजन के लिए सार्वजनिक कर दिए जाएंगे। इससे जमीन-जायदाद से संबंधित जानकारी तक पहुंच और भी आसान व पारदर्शी हो जाएगी, जिससे विवादों में कमी आने और आम लोगों का समय बचने की उम्मीद है।







