Bihar Politics: बिहार की राजनीतिक सरगर्मी इन दिनों पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के कारण चरम पर है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पिछले एक महीने से प्रशांत किशोर लगातार चर्चा में हैं और उनकी टीम ब्रांडिंग में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यूट्यूब, रील्स और इंटरव्यू के जरिए उनकी उपस्थिति हर जगह देखी जा रही है।
बांकीपुर में ‘जन सुराज’ का हाई-वोल्टेज प्रचार
जन सुराज पार्टी की पीआर टीम प्रशांत किशोर के भाषणों और इंटरव्यू के क्लिप्स को इस तरह से वायरल कर रही है, जिससे ऐसा लगे कि मैदान में उनका कोई मुकाबला ही नहीं है। पार्टी का दावा है कि वह इस उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने जा रही है। प्रशांत किशोर खुद लगातार रोड शो और जनसभाएं कर रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। उनकी रैलियों में सैकड़ों एसयूवी गाड़ियों का काफिला देखने को मिल रहा है, जो उनके समर्थकों की भीड़ को दर्शाता है।






2025 के विधानसभा चुनाव का सबक
हालांकि, बांकीपुर उपचुनाव में चल रहे इस आक्रामक प्रचार के बीच 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की हकीकत भी धीरे-धीरे सामने आने लगी है। याद रहे कि 2025 के जनवरी महीने से सितंबर के अंत तक सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया में प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी सबसे ज्यादा छाई हुई थी। उस दौरान प्रशांत किशोर हर इंटरव्यू और रैली में खुले तौर पर दावा कर रहे थे कि 243 सीटों वाले बिहार में उनकी पार्टी 200 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।

‘जनता ने मौका नहीं दिया’: प्रशांत किशोर ने ली थी जिम्मेदारी
2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच सीट बंटवारे का मसला करीब 15 अक्टूबर तक ही सुलझ पाया था, लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का प्रचार अभियान उससे कहीं पहले से ही चरम पर था। हालांकि, चुनाव परिणाम उनकी उम्मीदों के विपरीत आए। हार के बाद प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक रूप से पूरी जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा था:
“मैं 100% जिम्मेदारी लेता हूं। हमने ईमानदारी से कोशिश की, लेकिन जनता ने हमें मौका नहीं दिया।”
यह बयान आज भी उनके हर बड़े दावे के साथ एक कड़वे सच की तरह याद किया जाता है।
बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे 2025 के चुनावी नतीजों से सबक लेकर इस बार मतदाताओं का विश्वास जीत पाते हैं, या फिर उनके दावों और चुनावी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर उजागर होगा। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि प्रशांत किशोर का वर्तमान अभियान कितना सफल होता है।









