Darbhanga Army Jawan: बिहार के सपूत और सेना के जवान अखिलेश आनंद के पैतृक गांव दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान पूर्वी स्थित बड़गांव में खुशियों का इंतजार मातम में बदल गया। जिस घर में तीन साल की बेटी काव्या के जन्मदिन की तैयारियां चल रही थीं, सोमवार को वहीं तिरंगे में लिपटा अखिलेश का पार्थिव शरीर पहुंचा। यह हृदय विदारक दृश्य देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पिता अरुण कुमार राय, मां द्रोपदी देवी और पत्नी अंशु कुमारी अपनी आंखों के सामने इस त्रासदी को देखकर टूट गए।
बेटी के जन्मदिन का इंतजार, घर पहुंचा पार्थिव शरीर
शहीद अखिलेश आनंद छुट्टी लेकर अपनी तीन वर्षीय बेटी का जन्मदिन मनाने घर लौट रहे थे, तभी एक सड़क दुर्घटना में उनकी दुखद मृत्यु हो गई। एक पल में परिवार की सारी खुशियां और उम्मीदें बिखर गईं। देश की रक्षा करने वाला सेना का जवान अपने घर की दहलीज तक सुरक्षित नहीं पहुंच सका, यह घटना पूरे समाज के लिए बेहद पीड़ादायक और सोचने वाली है।







हजारों नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
दोपहर करीब एक बजे सेना के अधिकारी और जवान शहीद अखिलेश आनंद का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। जैसे ही तिरंगे में लिपटा ताबूत घर के आंगन में रखा गया, पूरा माहौल गमगीन हो गया। परिवार के सदस्यों ने तिरंगे को चूमकर अपने लाल को आखिरी प्रणाम किया। इसके बाद सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर सैनिक को अंतिम सलामी दी। पूरा गांव ‘भारत माता की जय’ और ‘अखिलेश आनंद अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा। अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की लंबी कतार लगी रही। विभिन्न जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आसपास के गांवों से आए लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
अखिलेश आनंद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। गांव की गलियां लोगों से भर गईं, हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम कंधा देने के लिए आगे बढ़ रहा था। श्मशान घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना की ओर से सलामी देने के बाद भतीजे अभिनव राज ने मुखाग्नि दी। इस दुखद घड़ी में बड़े भाई अभिषेक आनंद और मझले भाई अविनाश आनंद सहित पूरा परिवार मौजूद रहा।










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