Bihar Graduate MLC Election: कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव को लेकर बिहार की सियासत गरमा गई है। इस चुनाव में एमएलसी प्रत्याशी रजनीश रंजन ने भागलपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान चुनावी शंखनाद किया। उन्होंने वर्तमान एमएलसी पर सीधा हमला बोलते हुए स्नातकों, शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए और बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
वर्तमान एमएलसी पर सीधा हमला: ‘अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे’
भागलपुर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में रजनीश रंजन ने मौजूदा एमएलसी के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान एमएलसी अपने कार्यकाल में स्नातक मतदाताओं की उम्मीदों पर बिल्कुल खरे नहीं उतर सके हैं।






रजनीश रंजन ने कहा, “उच्च शिक्षा, बेरोजगारी, विश्वविद्यालयों में सत्र और परीक्षा व्यवस्था, वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपेक्षित पहल नहीं की गई।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बुनियादी समस्याओं पर कोई ठोस काम नहीं हुआ, जिससे स्नातक और शिक्षक वर्ग में भारी असंतोष है।

स्नातकों, शिक्षकों और युवाओं के लिए बड़े वादे
रजनीश रंजन ने मतदाताओं को भरोसा दिलाया कि अगर उन्हें जनता का आशीर्वाद मिलता है, तो वे विधान परिषद में एक सशक्त आवाज बनेंगे। उन्होंने स्नातकों, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों और शिक्षित युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाने का वादा किया।
रजनीश रंजन ने संकल्प लेते हुए कहा, “वित्त रहित शिक्षकों के अधिकार, सम्मान और बेहतर सुविधाओं के लिए भी लगातार संघर्ष करेंगे।”
उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से वे पूरे कोशी स्नातक क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, जिसमें उन्हें विभिन्न वर्गों के मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस बार स्नातक मतदाता विकास और सक्रिय प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर ही मतदान करेंगे। चुनाव जीतने पर रजनीश रंजन ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- प्रत्येक जिला मुख्यालय में स्नातक सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
- युवाओं को करियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
- विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को नियमित और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।
इन वादों के साथ, रजनीश रंजन ने कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एक नई राजनीतिक दिशा देने का प्रयास किया है, जिसका सीधा असर आगामी चुनाव परिणामों पर दिख सकता है।









