Bihar Drug Problem: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पटना में बच्चों के बीच बढ़ते नशे की समस्या पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल स्वास्थ्य या अपराध का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर सवाल है। मुख्य न्यायाधीश ने इस चुनौती से निपटने के लिए समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पटना आए थे। यहां ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ के तहत लोकभवन में आयोजित ‘ड्रग्स से परे बचपन : संरक्षण, देखभाल और पुनर्समावेशन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने बिहार को ज्ञान और विरासत की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि नशे की चपेट में आए हर बच्चे को उपचार, उचित देखभाल, शिक्षा और सामान्य जीवन में लौटने का अवसर मिलना ही चाहिए।

बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर गंभीर खतरा
मुख्य न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि बच्चों में मादक पदार्थों का सेवन उनकी शिक्षा को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इससे पारिवारिक रिश्तों में तनाव आता है और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चे शोषण, हिंसा, तस्करी और अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
बच्चों में नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य या अपराध का विषय नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था का असली मकसद बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसकी गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा करना होना चाहिए। बिहार में कई वर्षों से शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद, बच्चों के बीच नशे की समस्या पर यह चिंताजनक बयान एक नई बहस छेड़ सकता है।
उपचार के बाद भी जरूरी है निरंतर सहायता
न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि बाल संरक्षण की वास्तविक सफलता तब है, जब कोई बच्चा फिर से स्कूल, अपने परिवार और सामान्य सामाजिक जीवन से पूरी तरह जुड़ सके। उनका मानना है कि उपचार खत्म होने के बाद भी बच्चों को सहायता मिलती रहनी चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि बच्चा दोबारा उसी जोखिम भरे माहौल में न लौटे, जिससे उसे बचाया गया था।
उन्होंने समाज और सरकार दोनों से अपील की कि वे मिलकर एक ऐसा मजबूत तंत्र विकसित करें, जिससे बिहार में बच्चों को नशे के चंगुल से बचाया जा सके और उन्हें एक सुरक्षित व उज्ज्वल भविष्य प्रदान किया जा सके। यह एक ऐसी चुनौती है, जिसके लिए निरंतर प्रयास और सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है।


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